त्योहारी मिठास पर महंगाई : चीनी-घी के दाम बढ़े | ड्राई फ्रूट भी महंगे | ग्राहकों ने घटाई खरीदारी

त्योहारी सीजन की शुरुआत से पहले ही चीनी, घी और ड्राई फ्रूट की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी के साथ मिठाई कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में काजू, बादाम, किशमिश और पिस्ता सहित मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाले कई प्रमुख उत्पादों के दाम बढ़ने से मिठाइयों की लागत पर भी असर पड़ रहा है। कारोबारियों का कहना है कि कच्चा माल महंगा होने के कारण आने वाले त्योहारों में इसका असर मिठाइयों की कीमत और बिक्री दोनों पर दिखाई दे सकता है।
त्योहारी सीजन में मिठाइयों की मांग सामान्य दिनों के मुकाबले बढ़ जाती है। दुकानदारों के मुताबिक इस बार त्योहारों से पहले ही चीनी और ड्राई फ्रूट की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। चीनी के दाम बढ़ने को लेकर बाजार में अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं। कुछ लोग एथेनॉल उत्पादन को इसकी वजह मान रहे हैं, जबकि दुकानदारों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा स्टोरेज के कारण बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई है। हालांकि कीमतों में बढ़ोतरी के वास्तविक कारणों को लेकर कारोबारियों के अपने-अपने आकलन हैं।

ड्राई फ्रूट बाजार में भी महंगाई का असर दिखाई दे रहा है। कारोबारियों के अनुसार काजू, बादाम, किशमिश और पिस्ता सहित कई उत्पाद पहले के मुकाबले महंगे हुए हैं। त्योहार नजदीक आने के साथ इनकी मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में व्यापारियों को आशंका है कि आने वाले दिनों में कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। कुछ कारोबारियों का अनुमान है कि दिवाली तक बादाम की कीमत करीब 1250 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है।
घी के बढ़ते दाम भी मिठाई कारोबारियों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। मिठाई बनाने में चीनी और घी के साथ ड्राई फ्रूट का बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है। ऐसे में इन सभी प्रमुख सामग्रियों के महंगा होने से उत्पादन लागत बढ़ रही है। विक्रेताओं का कहना है कि पैकिंग और अन्य खर्चों में होने वाले बदलाव का असर भी अंतिम कीमत पर पड़ता है।

बाजार में बढ़ती कीमतों का असर ग्राहकों की खरीदारी पर भी दिखाई देने लगा है। आम लोगों का कहना है कि घरेलू आय में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है, जिस तेजी से रोजमर्रा के खर्च बढ़ रहे हैं। राशन और दूसरी जरूरतों पर पहले से अधिक पैसा खर्च होने के कारण त्योहारों के लिए अलग बजट निकालना मुश्किल होता जा रहा है।
त्योहारी दिनों में मिठाइयां खरीदना परंपरा का हिस्सा रहा है, लेकिन कारोबारियों के अनुसार महंगाई के कारण अब कई ग्राहक मात्रा कम कर रहे हैं। मिठाई विक्रेताओं का कहना है कि पहले एक किलो मिठाई खरीदने वाले कुछ ग्राहक अब आधा किलो तक खरीदारी सीमित कर रहे हैं। इससे साफ है कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का प्रभाव केवल दुकानदारों की लागत तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्राहकों के खरीदारी के तरीके पर भी पड़ रहा है।
कारोबारियों की नजर अब आने वाले त्योहारी सीजन पर है। यदि चीनी, घी और ड्राई फ्रूट की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है तो मिठाई कारोबार की लागत और बढ़ सकती है। वहीं आम लोगों के लिए भी त्योहारों के दौरान मिठाई और दूसरी खरीदारी पर अतिरिक्त खर्च का दबाव बढ़ने की संभावना है।
Editor: गरिमा बागोतिया



