फर्जी लोन ऐप से रहें सावधान : आसान लोन का झांसा | निजी डेटा पर खतरा | ठगी पर 1930 पर शिकायत

डिजिटल सुविधाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच फर्जी लोन ऐप के जरिए साइबर ठगी और ब्लैकमेल के मामलों को लेकर पुलिस ने लोगों को सतर्क किया है। पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल ने जिलावासियों से अपील की है कि बिना जांच-पड़ताल किसी लोन ऐप को डाउनलोड न करें और अनजान ऐप को कांटेक्ट लिस्ट, फोटो गैलरी, कैमरा तथा माइक्रोफोन जैसी निजी जानकारियों तक पहुंच की अनुमति न दें।
पुलिस प्रवक्ता के अनुसार साइबर अपराधी लोगों को आसान और तुरंत ऋण उपलब्ध कराने का लालच देकर अपने जाल में फंसाने का प्रयास करते हैं। फर्जी लोन ऐप पर बिना दस्तावेज लोन, कुछ मिनटों में पैसा, तुरंत अप्रूवल और कम ब्याज जैसे लुभावने ऑफर दिखाए जाते हैं। जल्द पैसा मिलने की उम्मीद में लोग कई बार बिना ऐप की विश्वसनीयता जांचे उसे डाउनलोड कर लेते हैं।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि साइबर ठग सोशल मीडिया विज्ञापन, व्हाट्सऐप मैसेज, एसएमएस और संदिग्ध लिंक के माध्यम से फर्जी लोन ऐप डाउनलोड करवाने का प्रयास करते हैं। ऐप इंस्टॉल होने के बाद कांटेक्ट लिस्ट, फोटो गैलरी, कैमरा, माइक्रोफोन, लोकेशन और अन्य निजी डेटा तक पहुंच की अनुमति मांगी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि बिना सोचे-समझे ऐसी अनुमति देने से उपयोगकर्ता की निजी जानकारी साइबर अपराधियों के हाथ लग सकती है। इसके बाद इसी जानकारी का इस्तेमाल पीड़ित पर दबाव बनाने और उसे परेशान करने के लिए किया जा सकता है।
पुलिस के मुताबिक कुछ मामलों में शुरुआत में छोटी राशि खाते में डालकर पीड़ित का भरोसा हासिल किया जाता है। इसके बाद भारी ब्याज, अतिरिक्त शुल्क और जल्द भुगतान करने का दबाव बनाया जाता है। भुगतान नहीं करने की स्थिति में पीड़ित के परिचितों से संपर्क करने या निजी जानकारी का दुरुपयोग करने की धमकी देकर उसे परेशान किया जा सकता है।
पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल ने कहा कि आसान लोन के लालच में किया गया एक गलत क्लिक निजी जानकारी और बैंक खाते को खतरे में डाल सकता है। किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता और लोन देने वाली संस्था की पूरी जानकारी जांचना जरूरी है।
उन्होंने नागरिकों से ऋण के लिए विश्वसनीय बैंक अथवा अधिकृत वित्तीय संस्थानों के आधिकारिक माध्यमों का ही इस्तेमाल करने की अपील की। किसी अनजान लिंक से ऐप डाउनलोड न करें। लोन लेने से पहले ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और नियम एवं शर्तों को अच्छी तरह समझना जरूरी है।
पुलिस ने लोगों को सलाह दी कि अनजान ऐप को कांटेक्ट, गैलरी, माइक्रोफोन और अन्य निजी डेटा की अनावश्यक अनुमति न दें। किसी संदिग्ध ऑफर पर तुरंत विश्वास करने के बजाय पहले संबंधित संस्था और ऐप की प्रामाणिकता की जांच करें।
साइबर ठगी होने की स्थिति में पीड़ित को जल्द से जल्द राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा आधिकारिक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है अथवा नजदीकी साइबर थाना या पुलिस थाना से संपर्क किया जा सकता है।
पुलिस ने संबंधित चैट, मोबाइल नंबर, स्क्रीनशॉट, बैंक ट्रांजेक्शन और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने की भी सलाह दी है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि साइबर ठगी से बचने में जागरूकता और सतर्कता सबसे महत्वपूर्ण है। किसी भी लुभावने डिजिटल ऑफर पर विश्वास करने से पहले उसकी जांच जरूर करें।
जिला पुलिस की ओर से साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई के साथ लोगों को जागरूक करने के लिए स्कूलों, कॉलेजों, गांवों और सार्वजनिक स्थानों पर साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
Editor: गरिमा बागोतिया



