कम लागत के नवाचार पर जोर : छात्राओं को उद्यमिता की सीख | स्टार्टअप की प्रक्रिया समझाई

डीएवी गर्ल्स कॉलेज के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) की ओर से छात्राओं को नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से कम लागत वाला नवाचार एवं उद्यम विषय पर एक्सटेंशन लेक्चर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में इनोवेशन एंबेसडर डॉ. मोनिका शर्मा और ममता थापर मुख्य वक्ता रहीं। वक्ताओं ने छात्राओं को सीमित संसाधनों के साथ नए विचारों को विकसित कर उन्हें व्यावसायिक अवसरों में बदलने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज की कार्यवाहक प्रिंसिपल एवं आईआईसी प्रेसिडेंट डॉ. सुरिंदर कौर तथा आईआईसी कनवीनर विवेक ने की। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को बताया गया कि नवाचार के लिए हमेशा बड़े निवेश या अत्याधुनिक संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती। किसी समस्या की सही पहचान और उसके व्यावहारिक समाधान से छोटे स्तर पर भी एक सफल शुरुआत की जा सकती है।

मुख्य वक्ता डॉ. मोनिका शर्मा ने छात्राओं को नवाचार, प्रयोग और निरंतर सुधार की भावना के साथ उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसी नए विचार को शुरुआत में छोटे स्तर पर प्रयोग में लाया जा सकता है। उसके परिणामों और लोगों से मिलने वाली प्रतिक्रिया का अध्ययन कर विचार में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।
उन्होंने छात्राओं से कहा कि नए विचारों को केवल सोच तक सीमित रखने के बजाय उन्हें व्यावहारिक रूप देने का प्रयास करना चाहिए। छोटे प्रयोग के माध्यम से किसी उत्पाद या सेवा की उपयोगिता का आकलन किया जा सकता है और सफल होने पर उसे आगे चलकर व्यवसाय का रूप दिया जा सकता है।

इनोवेशन एंबेसडर शैली चौहान और वैशाली वर्मा ने भी छात्राओं के साथ नवाचार से संबंधित अपने विचार साझा किए। उन्होंने छात्राओं को अपने आसपास की समस्याओं और आवश्यकताओं को समझकर उनके समाधान के लिए नए विचार विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
मुख्य वक्ता ममता थापर ने छोटे स्तर पर शुरू किए जा सकने वाले स्टार्टअप की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी उत्पाद अथवा सेवा को विकसित करने से पहले यह समझना जरूरी है कि संभावित ग्राहकों की वास्तविक आवश्यकता क्या है। ग्राहक की समस्या और जरूरत की सही पहचान होने पर ही उपयोगी उत्पाद विकसित किया जा सकता है।

उन्होंने कम संसाधनों में शुरुआती उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया समझाते हुए कहा कि किसी भी नए उत्पाद को सीधे बड़े स्तर पर तैयार करने के बजाय पहले सीमित स्तर पर विकसित किया जा सकता है। इसके बाद संभावित ग्राहकों से प्रतिक्रिया लेकर उत्पाद की खूबियों और कमियों की पहचान की जा सकती है।
ममता थापर ने कहा कि ग्राहकों से प्राप्त प्रतिक्रिया नवाचार की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रतिक्रिया के आधार पर उत्पाद या सेवा में लगातार सुधार करने से उसकी उपयोगिता बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने छात्राओं को छोटे स्तर से शुरुआत करने और अनुभव के आधार पर अपने उद्यम को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दूसरे हिस्से में छात्राओं को एमआईसी एवं एआईसीटीई की ओर से आयोजित ऑनलाइन लेक्चर भी दिखाया गया। इसमें भारत सरकार के कंट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट, डिजाइन एंड ट्रेड मार्क्स के प्रोफेसर डॉ. उन्नत पी. पंडित मुख्य वक्ता रहे।
ऑनलाइन व्याख्यान के दौरान छात्राओं को बौद्धिक संपदा अधिकारों के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी गई। डॉ. पंडित ने नवाचारों को सुरक्षित रखने में पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क के महत्व को समझाया। छात्राओं को बताया गया कि किसी नए विचार, उत्पाद अथवा डिजाइन को विकसित करने के साथ उससे जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकारों की जानकारी होना भी आवश्यक है।
कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को नवाचार से लेकर उद्यम स्थापित करने तक की प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिला। उन्हें नए विचार विकसित करने, सीमित संसाधनों में प्रयोग करने, ग्राहकों की आवश्यकताओं को समझने और प्रतिक्रिया के आधार पर उत्पाद में सुधार करने के बारे में जानकारी दी गई।
कॉलेज की कार्यवाहक प्रिंसिपल एवं आईआईसी प्रेसिडेंट डॉ. सुरिंदर कौर ने कहा कि विद्यार्थियों में नवाचार और उद्यमिता की सोच विकसित करना वर्तमान समय की आवश्यकता है। इस तरह के कार्यक्रम छात्राओं को पढ़ाई के साथ नए विचारों पर काम करने और स्वरोजगार तथा स्टार्टअप की संभावनाओं को समझने में मदद करते हैं।
आईआईसी कनवीनर विवेक ने कहा कि इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल के माध्यम से छात्राओं को नवाचार और उद्यमिता से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. परमेश कुमार ने सहयोग दिया।
Editor: गरिमा बागोतिया



