DAV इंजीनियरिंग कॉलेज दोबारा खोलने की मांग : 58 एकड़ में फैला संस्थान वर्षों से बंद | मुख्य द्वार पर शुरू हुआ सांकेतिक धरना

क्षेत्र के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में शामिल रहे डीएवी इंजीनियरिंग कॉलेज को दोबारा शुरू करवाने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। रविवार को नगर के प्रबुद्धजनों ने कॉलेज के मुख्य द्वार के बाहर बैठक कर संस्थान को पुनः संचालित करने की मांग उठाई। बैठक की अध्यक्षता हरेंद्र शर्मा ने की। इस दौरान निर्णय लिया गया कि जब तक शिक्षण संस्थान को दोबारा शुरू करने की दिशा में कदम नहीं उठाया जाता, तब तक मुख्य द्वार के बाहर प्रतिदिन सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
बैठक में वक्ताओं ने बताया कि डीएवी शिक्षण संस्थान करीब 58 एकड़ भूमि में फैला हुआ है। लंबे समय तक यह संस्थान कनीना और आसपास के क्षेत्र में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा। यहां हरियाणा के अलावा देश के विभिन्न प्रदेशों से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए पहुंचते थे।

हरेंद्र शर्मा ने कहा कि इतने बड़े शिक्षण संस्थान का वर्षों से बंद रहना क्षेत्र के विद्यार्थियों के हित में नहीं है। संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने वाले हजारों विद्यार्थी अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़े और अनेक विद्यार्थियों ने सरकारी सेवाओं तथा बड़ी निजी कंपनियों में रोजगार हासिल किया।

प्रदर्शनकारियों के अनुसार डीएवी इंजीनियरिंग कॉलेज वर्ष 2019 से बंद है। लंबे समय से शिक्षण गतिविधियां नहीं होने के कारण परिसर और भवनों की स्थिति भी प्रभावित हुई है। लोगों का कहना है कि जिस संस्थान में कभी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की आवाजाही रहती थी, आज वहां शिक्षण गतिविधियां बंद हैं।
नगर के प्रबुद्धजनों ने डीएवी प्रशासन और सरकार से इस मामले में पहल करने की मांग की। उनका कहना है कि मौजूदा संसाधनों और विशाल परिसर का दोबारा शिक्षा के लिए उपयोग किया जाना चाहिए। संस्थान शुरू होने से कनीना सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कॉलेज बंद होने का असर केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। किसी बड़े शिक्षण संस्थान के संचालन से आसपास आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ती हैं और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। ऐसे में संस्थान को दोबारा शुरू किया जाता है तो इसका लाभ विद्यार्थियों के साथ पूरे क्षेत्र को मिल सकता है।
लोगों ने कहा कि डीएवी शिक्षण संस्थान की शुरुआत वर्ष 1992 में हुई थी। इसके बाद यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र-छात्राएं पढ़ाई के लिए आते रहे। संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की बड़ी संख्या को देखते हुए इसे क्षेत्र की महत्वपूर्ण शैक्षणिक विरासत के रूप में भी देखा जाता है।
नगर के लोगों का कहना है कि अब इस संस्थान को दोबारा शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करने की जरूरत है। लंबे समय तक बंद रहने के कारण भवनों की हालत भी खराब होती जा रही है। समय रहते पहल नहीं की गई तो पहले से मौजूद शैक्षणिक बुनियादी ढांचे को और नुकसान पहुंच सकता है।
बैठक में मौजूद लोगों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि कॉलेज को दोबारा शुरू करवाने की मांग को लगातार उठाया जाएगा। इसके लिए मुख्य द्वार के बाहर प्रतिदिन सांकेतिक धरना-प्रदर्शन जारी रखने का निर्णय लिया गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य सरकार और डीएवी प्रबंधन तक क्षेत्र के लोगों की मांग पहुंचाना है।
बैठक में नगर पालिका उपप्रधान सुबे सिंह, पार्षद होशियार सिंह, पार्षद नितेश गुप्ता, पार्षद राजू, संजय शर्मा सहित नगर एवं आसपास के क्षेत्र के अनेक प्रबुद्धजन और ग्रामीण मौजूद रहे।
Editor: गरिमा बागोतिया



