जीएसटी सुधारों पर मंथन : दो दिवसीय कॉन्क्लेव संपन्न | जमीनी प्रभाव पर चर्चा

हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में “जीएसटी सुधार और जमीनी प्रभाव: स्थानीय व्यवसायों और समुदायों की आवाज़” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का समापन हुआ। विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग की ओर से भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के सहयोग से आयोजित कॉन्क्लेव में जीएसटी सुधारों के जमीनी प्रभाव, डिजिटलीकरण, पारदर्शिता, कर अनुपालन और व्यवसाय करने में सुगमता जैसे विषयों पर विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और हितधारकों ने विचार साझा किए।
कॉन्क्लेव के दूसरे दिन “डिजिटलीकरण, पारदर्शिता और व्यवसाय करने में सुगमता” विषय पर राउंडटेबल चर्चा हुई। सत्र का समन्वय डॉ. रश्मि तंवर और डॉ. सुमित कुमार ने किया, जबकि अध्यक्षता प्रो. आनंद शर्मा ने की। चर्चा में बीपीएस महिला विश्वविद्यालय के प्रो. सुरिंदर मोर, सीयूएच के वाणिज्य विभाग की प्रो. सुशीला कुमारी सौर्या तथा पर्यटन एवं होटल प्रबंधन विभाग के प्रो. अंकुश अंबदार ने भाग लिया।
चर्चा में डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने और कारोबारियों के लिए प्रक्रियाओं को सरल करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया। वक्ताओं ने जीएसटी व्यवस्था के व्यावहारिक प्रभावों और स्थानीय स्तर पर व्यवसायों के सामने आने वाले अनुभवों को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इसके बाद “जीएसटी के माध्यम से अनुपालन को सरल बनाने और स्थानीय उद्यमों को सशक्त बनाने पर स्थानीय समुदाय के साथ संवाद: व्यावहारिक अनुभव” विषय पर संवाद सत्र आयोजित किया गया। इसका समन्वय प्रबंधन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुराग बी. सिंह और अर्थशास्त्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुमित कुमार ने किया। सीए राहुल बंसल और डॉ. अनुराग बी. सिंह ने प्रतिभागियों के साथ अपने विचार और व्यावहारिक अनुभव साझा किए।
दोपहर बाद आयोजित समापन सत्र में प्रो. अमनदीप वर्मा ने औपचारिक स्वागत संबोधन दिया। कॉन्क्लेव के संयोजक प्रो. रंजन अनेजा ने दो दिनों के दौरान आयोजित विभिन्न सत्रों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने चर्चा के प्रमुख बिंदुओं, निष्कर्षों और विभिन्न विशेषज्ञों से प्राप्त सुझावों की जानकारी दी।
स्कूल ऑफ बिजनेस, मैनेजमेंट एंड सोशल साइंसेज की अधिष्ठाता प्रो. सुनीता तंवर ने जीएसटी सुधारों के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को समझने में अकादमिक विमर्श की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी कर सुधार की प्रभावशीलता का आकलन इस आधार पर किया जाना चाहिए कि उसका वास्तविक जमीनी प्रभाव क्या है।
विशिष्ट अतिथि केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के प्रो. संजीत सिंह ने जीएसटी सुधारों के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखते हुए स्थानीय व्यवसायों और समुदायों की आवश्यकताओं को नीति निर्माण में उचित स्थान दिए जाने पर जोर दिया। उन्होंने स्थानीय स्तर से सामने आने वाले अनुभवों और चुनौतियों को नीति संबंधी विमर्श का हिस्सा बनाने की आवश्यकता बताई।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि एवं हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के सम कुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कॉन्क्लेव के आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि जीएसटी जैसे व्यापक आर्थिक सुधारों को सफल बनाने के लिए पारदर्शिता, डिजिटल तकनीक, सरल अनुपालन और व्यवसाय करने में सुगमता को लगातार मजबूत करना आवश्यक है।
प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालयों में होने वाले इस तरह के अकादमिक संवाद शोध को जमीनी अनुभवों और सार्वजनिक नीति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों, स्थानीय हितधारकों और शोधकर्ताओं के बीच संवाद से नीतियों के व्यावहारिक प्रभाव को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है।
दो दिवसीय आयोजन में जीएसटी सुधारों के साथ डिजिटलीकरण, पारदर्शिता, कर अनुपालन, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और स्थानीय व्यवसायों तथा समुदायों पर पड़ने वाले प्रभावों पर व्यापक चर्चा हुई। कॉन्क्लेव का उद्देश्य स्थानीय व्यवसायों और समुदायों के अनुभवों के आधार पर जीएसटी सुधारों के जमीनी प्रभाव को समझने के साथ नीति के लिए उपयोगी सुझाव विकसित करना रहा।
कॉन्क्लेव के समापन पर अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. सुमित कुमार ने अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों और आयोजन से जुड़े सदस्यों का औपचारिक धन्यवाद किया।
Editor: गरिमा बागोतिया



