लैब से उद्योग तक नवाचार पर मंथन : विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित | व्यावसायीकरण की चुनौतियां बताईं

हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के संयुक्त तत्वावधान में ‘लैब से उद्योग तक: चुनौतियाँ एवं अवसर’ विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों को प्रयोगशाला में विकसित वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवाचारों को व्यावहारिक औद्योगिक अनुप्रयोगों में परिवर्तित करने की प्रक्रिया से परिचित कराना रहा।
कार्यक्रम में विशेषज्ञ वक्ता के रूप में प्रोबायोटिया इनोवेशंस प्राइवेट लिमिटेड की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डॉ. श्रीलक्ष्मी देसीराजू ने हिस्सा लिया। उन्होंने प्रयोगशाला में होने वाले शोध को उद्योग तक पहुंचाने की प्रक्रिया में सामने आने वाली चुनौतियों के साथ उपलब्ध अवसरों की विस्तार से जानकारी दी।

डॉ. देसीराजू ने कहा कि प्रयोगशाला में विकसित किसी नवाचार का केवल तकनीकी रूप से सक्षम होना उसके सफल व्यावसायीकरण के लिए पर्याप्त नहीं है। किसी भी नवाचार की सफलता के लिए यह जरूरी है कि वह वास्तविक ग्राहक आवश्यकता का समाधान करे और उसके पास स्पष्ट एवं प्रभावी मूल्य प्रस्ताव हो।
उन्होंने विपणन की सात प्रमुख प्रक्रियाओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। इनमें बाजार की आवश्यकता की पहचान, लक्षित ग्राहकों की पहचान, मूल्य प्रस्ताव का विकास, बाजार सत्यापन, उत्पाद की स्थिति का निर्धारण, बाजार में प्रवेश की रणनीति तैयार करना तथा विस्तार एवं निरंतर सुधार शामिल हैं।
विशेषज्ञ व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों और शोधार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रयोगशाला तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यावहारिक उपयोग के लिए किस प्रकार आगे बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ नवाचार, उद्यमिता, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्योगोन्मुखी अनुसंधान से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) टंकेश्वर कुमार के मार्गदर्शन में किया गया। उन्होंने शैक्षणिक अनुसंधान और उद्योग के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं में विकसित नवाचारी विचारों को उपयोगी तकनीकों, उत्पादों और सेवाओं में परिवर्तित करने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।
सम-कुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा ने समाज के लिए अनुवादात्मक अनुसंधान यानी ट्रांसलेशनल रिसर्च के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों को ऐसे विषयों पर अनुसंधान करने के लिए प्रेरित किया, जिनका संबंध समाज की वास्तविक आवश्यकताओं और समस्याओं से हो।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों ने भाग लिया। विशेषज्ञ वक्ता द्वारा साझा किए गए अनुभवों और जानकारियों के माध्यम से प्रतिभागियों को शोध के औद्योगिक उपयोग तथा उसके व्यावसायीकरण की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला।
विशेषज्ञ व्याख्यान का समन्वय IQAC के निदेशक प्रो. सुरेंद्र सिंह तथा सूक्ष्मजीव विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. विकास बेनीवाल ने किया। आयोजकों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम अकादमिक अनुसंधान और उद्योग के बीच की दूरी कम करने के साथ विद्यार्थियों में नवाचार एवं उद्यमिता की सोच विकसित करने में उपयोगी साबित होते हैं।
Editor: गरिमा बागोतिया



