श्मशान की 100 फीट दीवार ढही : निर्माण के कुछ समय बाद गिरी | ग्रामीणों ने गुणवत्ता पर उठाए सवाल

गांव बुढ़वाल में पंचायती विभाग के तहत श्मशान भूमि में करवाई गई चारदीवारी के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। निर्माण के कुछ समय बाद ही चारदीवारी का करीब 100 फीट लंबा हिस्सा ढह गया। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं और गुणवत्ता से समझौता किए जाने का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान भूमि की चारदीवारी का निर्माण पंचायती विभाग के तहत करवाया गया था। निर्माण कार्य के दौरान सरपंच, ग्राम सचिव, जेई और संबंधित अधिकारियों की निगरानी की जिम्मेदारी थी। इसके बावजूद दीवार का कुछ ही समय में गिर जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार चारदीवारी का करीब 100 फीट लंबा हिस्सा अचानक ढह गया। उनका कहना है कि जिस समय दीवार गिरी, उस दौरान न तो बारिश हुई थी और न ही बाढ़ जैसी कोई स्थिति थी। ऐसे में ग्रामीण यह जानना चाहते हैं कि सामान्य परिस्थितियों में ही दीवार इतनी जल्दी कैसे गिर गई।
दीवार गिरने के दौरान आसपास किसी व्यक्ति के मौजूद नहीं होने से बड़ा हादसा टल गया। ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान भूमि में लोगों का आना-जाना रहता है। यदि दीवार गिरने के समय कोई व्यक्ति इसकी चपेट में आ जाता तो गंभीर घटना हो सकती थी।

ग्रामीणों और पूर्व सरपंच ने निर्माण कार्य में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनकी मांग है कि मौके पर हुए वास्तविक निर्माण और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कार्य का मिलान कराया जाए। इसके साथ ही निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और तकनीकी मानकों की भी जांच करवाई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी राशि से होने वाले निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होती है। निर्माण के दौरान तकनीकी निरीक्षण और गुणवत्ता की जांच की गई थी या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए। यदि कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ था तो दीवार इतनी जल्दी गिरने का कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए।
मामले ने निर्माण कार्य की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीण जानना चाहते हैं कि चारदीवारी का निर्माण पूरा होने के बाद किस स्तर पर इसकी जांच की गई और कार्य को संतोषजनक मानकर किस आधार पर स्वीकार किया गया। निर्माण से संबंधित रिकॉर्ड की जांच से ही इन सवालों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों ने सरपंच, ग्राम सचिव, जेई और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि मौके का निरीक्षण करवाकर ढही हुई दीवार के कारणों का पता लगाया जाए। इसके साथ निर्माण सामग्री, सरकारी रिकॉर्ड, खर्च की गई राशि और तकनीकी निरीक्षण से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जाए।
फिलहाल ग्रामीणों की ओर से निर्माण में अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की पुष्टि विभागीय या तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी। ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक धन से करवाए गए निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए और पूरे मामले की पारदर्शी जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।
Editor: शिवानी राजपूत



