श्मशान की दीवार गिरी : ग्रामीणों का सांकेतिक धरना | SIT करेगी जांच | BDPO कैमरा देख निकले

गांव बुढ़वाल में श्मशान भूमि के विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। कुछ दिन पहले श्मशान भूमि में बनाई गई चारदीवारी गिरने के बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठा रहे ग्रामीणों ने अब खंड कार्यालय परिसर में एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया। ग्रामीणों ने पूरे विकास कार्य की निष्पक्ष जांच करवाने और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।
ग्रामीणों के अनुसार गांव की श्मशान भूमि में विकास कार्य के तहत चारदीवारी का निर्माण करवाया गया था। आरोप है कि निर्माण के कुछ समय बाद ही दीवार गिर गई। ग्रामीणों का दावा है कि जिस समय चारदीवारी गिरी, उस दौरान न बारिश हुई थी और न ही कोई तेज तूफान आया था। ऐसे में उन्होंने निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान भूमि सार्वजनिक उपयोग की जगह है और इसके विकास पर खर्च होने वाली राशि का सही तरीके से इस्तेमाल होना चाहिए। यदि चारदीवारी निर्धारित मानकों और उचित गुणवत्ता के साथ बनाई गई थी तो वह सामान्य परिस्थितियों में कैसे गिर गई, इसकी जांच जरूरी है। ग्रामीणों ने विकास कार्यों में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप भी लगाए हैं, हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मामले को लेकर ग्रामीण खंड कार्यालय परिसर पहुंचे और एक दिवसीय सांकेतिक धरना शुरू कर दिया। धरने के माध्यम से ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने मांग रखी कि श्मशान भूमि में करवाए गए विकास कार्यों से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाए। साथ ही निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, कार्य की गुणवत्ता और चारदीवारी गिरने के कारणों की निष्पक्ष जांच करवाई जाए।
धरने की जानकारी मिलने पर बीडीपीओ इशांत शर्मा मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। ग्रामीणों ने उनके सामने पूरे मामले से जुड़ी अपनी शिकायतें और मांगें रखीं। बातचीत के बाद प्रशासन की ओर से मामले की जांच एसआईटी यानी विशेष जांच टीम के माध्यम से करवाने का निर्णय लिया गया।
बताया गया कि एसआईटी में तीन विभागीय कर्मचारियों के साथ तीन ग्रामीणों को भी सदस्य बनाया जाएगा। ग्रामीणों को जांच प्रक्रिया में शामिल करने का उद्देश्य पूरे मामले की जांच में पारदर्शिता बनाए रखना है। संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेज एक सप्ताह के भीतर एसआईटी को सौंपे जाने की बात कही गई है। इसके बाद टीम उपलब्ध रिकॉर्ड और तथ्यों के आधार पर मामले की जांच करेगी।
ग्रामीणों की प्रमुख मांग श्मशान भूमि में हुए विकास कार्यों की गुणवत्ता की जांच करवाने की है। उनका कहना है कि चारदीवारी का गिरना अपने आप में गंभीर सवाल खड़ा करता है। निर्माण किस एजेंसी या स्तर पर करवाया गया, इसमें किस सामग्री का इस्तेमाल हुआ और निर्धारित मापदंडों का पालन किया गया या नहीं, इन सभी बिंदुओं को जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति पर बिना जांच दोष तय करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन से हुए निर्माण की वास्तविक स्थिति सामने लाना है। एसआईटी की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चारदीवारी गिरने का वास्तविक कारण क्या था और विकास कार्य में किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी या नहीं।
धरने के दौरान धर्मबीर सरपंच, रमेश कुमार, महावीर, सरजीत, कर्ण सिंह, पूर्व सरपंच मनोज कुमार, हरि राम, पूर्व सरपंच बनवारी लाल, झमन पंच, रामेश्वर पंच, रमेश, राजू, उमेश, मुकेश, सोमवीर, राहुल, सूरज भान, प्रदीप और छितर सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से जांच की मांग उठाते हुए प्रशासन से मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा जताई।
बीडीपीओ की ओर से जांच करवाने का आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने अपना एक दिवसीय सांकेतिक धरना समाप्त कर दिया। अब पूरे मामले में एसआईटी की जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच में निर्माण से जुड़े दस्तावेजों और अन्य तथ्यों के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि चारदीवारी किन परिस्थितियों में गिरी और निर्माण कार्य में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई थी या नहीं।
धरने पर बैठे पूर्व सरपंच मनोज कुमार ने भी मामले को लेकर ग्रामीणों का पक्ष रखा और निष्पक्ष जांच की मांग की। वहीं पूरे प्रकरण पर बीडीपीओ इशांत शर्मा का कैमरे पर पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन वे कैमरा देखकर बिना कोई प्रतिक्रिया दिए वहां से चले गए। ऐसे में इस मामले पर उनका कैमरे पर पक्ष सामने नहीं आ सका।
फिलहाल प्रशासन की ओर से एसआईटी जांच के निर्णय के बाद ग्रामीणों ने धरना समाप्त कर दिया है। अब ग्रामीणों की नजर जांच और उसकी रिपोर्ट पर है। जांच के बाद ही श्मशान भूमि की चारदीवारी गिरने के कारणों तथा विकास कार्य में लगाए जा रहे अनियमितताओं के आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
Editor: गरिमा बागोतिया



