जिला जेल में लगी लोक अदालत : मामलों की हुई सुनवाई | महिला बंदी सम्मानित | व्यवस्थाओं का लिया जायजा

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जिला जेल में जेल लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की चेयरपर्सन एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. रितु वाई.के. बहल की मौजूदगी में आयोजित लोक अदालत में विभिन्न मामलों की सुनवाई की गई। इस दौरान महिला बंदियों के लिए संचालित हस्तशिल्प प्रशिक्षण कार्यक्रम की समीक्षा कर प्रशिक्षण में बेहतर प्रदर्शन करने वाली महिला बंदियों को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नीलम कुमारी भी मौजूद रहीं। जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. रितु वाई.के. बहल ने जेल में बंदियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और उनके पुनर्वास के उद्देश्य से चलाई जा रही गतिविधियों के बारे में जानकारी ली।

उन्होंने महिला बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, उनके पुनर्वास और स्वावलंबन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित ‘स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम फॉर फीमेल जेल इनमेट्स’ की समीक्षा की। इस कार्यक्रम के तहत महिला बंदियों को हस्तशिल्प एवं हैंडीक्राफ्ट निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया है।
प्रशिक्षण अवधि के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने और हस्तशिल्प कला में निपुणता हासिल करने वाली महिला बंदियों को डॉ. रितु वाई.के. बहल ने प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने महिला बंदियों का हौसला बढ़ाते हुए प्रशिक्षण के दौरान हासिल किए गए कौशल को आगे भी उपयोग में लाने के लिए प्रेरित किया।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि जेल में सीखा गया हुनर महिला बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक हो सकता है। रिहाई के बाद हस्तशिल्प कौशल उनके लिए स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम बन सकता है। इससे उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने और नए सिरे से आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।
जेल लोक अदालत में छोटे-मोटे आपराधिक और आपसी समझौते योग्य मामलों की सुनवाई की गई। मामलों से संबंधित पक्षों और कानूनी पहलुओं को देखते हुए नियमानुसार निपटारे की प्रक्रिया पर विचार किया गया तथा कई मामलों में मौके पर ही कानूनी प्रक्रिया के तहत निपटारे के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नीलम कुमारी ने जेल में कैदियों और बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही निशुल्क कानूनी सहायता की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध विधिक सहायता से संबंधित जानकारी भी दी।
निरीक्षण के दौरान जेल में भोजन की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल और साफ-सफाई की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया गया। संबंधित अधिकारियों से इन सुविधाओं के बारे में जानकारी लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
जेल लोक अदालत और निरीक्षण के माध्यम से बंदियों के मामलों के कानूनी निपटारे के साथ उनके पुनर्वास और उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं पर भी ध्यान दिया गया। महिला बंदियों को हस्तशिल्प प्रशिक्षण पूरा करने पर सम्मानित कर उन्हें भविष्य में इस कौशल का उपयोग करते हुए आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
Editor: गरिमा बागोतिया



