हमले का CCTV आया सामने : वन टीम पर चढ़ाई JCB | ड्राइवर मशीन छोड़कर फरार | कर्मचारियों ने भागकर बचाई जान
थाना क्षेत्र के गांव बायल की अरावली पर्वत श्रृंखला में कथित अवैध खनन रोकने पहुंची वन विभाग की टीम पर जेसीबी चढ़ाने के मामले में अब घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। फुटेज में जेसीबी के पीछे सरकारी मोटरसाइकिल पर वन कर्मचारी आते दिखाई दे रहे हैं। घटनाक्रम के दौरान कर्मचारियों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा और सरकारी मोटरसाइकिल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद जेसीबी चालक मशीन को मौके पर छोड़कर फरार हो गया।
वन कर्मचारी सिकंदर के अनुसार टीम को गांव बायल की अरावली पर्वत श्रृंखला में अवैध खनन किए जाने की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर कर्मचारी मौके पर पहुंचे। आरोप है कि वहां जेसीबी और अन्य वाहनों के जरिए अवैध खनन किया जा रहा था। वन विभाग की टीम को देखते ही जेसीबी को मौके से भगाने का प्रयास किया गया।

इसके बाद वन कर्मचारियों ने सरकारी मोटरसाइकिल से जेसीबी का पीछा शुरू किया। पीछा करते हुए कर्मचारी क्रशर जोन क्षेत्र तक पहुंच गए। अब सामने आए सीसीटीवी फुटेज में भी जेसीबी और उसके पीछे बाइक सवार कर्मचारियों के आने का घटनाक्रम दिखाई दे रहा है। वन विभाग का आरोप है कि कर्मचारियों ने जेसीबी को रोकने का प्रयास किया तो उनके ऊपर ही मशीन चढ़ा दी गई।

कर्मचारियों ने खतरा देखते ही भागकर अपनी जान बचाई। इस दौरान सरकारी मोटरसाइकिल जेसीबी की चपेट में आकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। घटना में वन कर्मचारी हवा सिंह के घायल होने की बात भी सामने आई है। गनीमत रही कि तीनों कर्मचारी समय रहते वहां से हट गए और बड़ा जानी नुकसान टल गया।

घटना के बाद जेसीबी चालक मशीन को मौके पर ही छोड़कर फरार हो गया। अब सीसीटीवी फुटेज सामने आने से जांच के लिए महत्वपूर्ण दृश्य साक्ष्य भी उपलब्ध हो गया है। मौके पर छोड़ी गई जेसीबी और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चालक तथा घटना से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और भूमिका की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

इस पूरे घटनाक्रम ने अरावली क्षेत्र में अवैध खनन रोकने के लिए जिम्मेदार तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब वन विभाग के कर्मचारियों को स्वयं मौके पर पहुंचकर कथित अवैध खनन में लगी जेसीबी का पीछा करना पड़ा और स्थिति कर्मचारियों की जान पर बन आई तो सवाल है कि क्षेत्र में अवैध खनन की निगरानी और रोकथाम के लिए मौजूद व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
वन विभाग के कर्मचारियों ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि अवैध खनन से जुड़ी शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई नहीं होती। कर्मचारियों के अनुसार करीब दो दिन पहले भी इसी तरह की घटना को लेकर थाने में शिकायत देने का प्रयास किया गया था, लेकिन शिकायत नहीं ली गई। इसके बाद शिकायत डाक के माध्यम से भेजी गई। इन आरोपों पर स्थानीय पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी है।
अगर वन कर्मचारियों के आरोप सही हैं तो यह सवाल भी अहम है कि पहले दी गई शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई थी। यदि पहले से क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियों की शिकायत थी तो उस पर क्या कदम उठाए गए और कथित अवैध खनन को रोकने के लिए निगरानी क्यों प्रभावी नहीं हो सकी, इसकी जांच जरूरी हो जाती है।
हरियाणा सरकार द्वारा अवैध खनन और इससे जुड़ी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए अलग एनफोर्समेंट व्यवस्था बनाई गई है। इसके बावजूद अरावली क्षेत्र में कथित तौर पर जेसीबी से खनन होने और वन कर्मचारियों को उसका पीछा करने की नौबत आने से एनफोर्समेंट की सक्रियता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि अलग तंत्र मौजूद है तो अवैध खनन की गतिविधि उसकी निगरानी से कैसे बची, यह भी बड़ा सवाल है।

सीसीटीवी सामने आने के बाद अब जांच का दायरा और महत्वपूर्ण हो गया है। मौके पर छोड़ी गई जेसीबी किसकी है, उसे कौन चला रहा था, मशीन वहां किस उद्देश्य से लाई गई थी और घटना के समय चालक के साथ अन्य कौन लोग मौजूद थे, इन सवालों के जवाब से पूरे घटनाक्रम की तस्वीर और साफ हो सकती है।
वन कर्मचारी सिकंदर के मुताबिक टीम सूचना के आधार पर अरावली क्षेत्र में पहुंची थी। वहां कथित अवैध खनन होता देखकर कार्रवाई की गई। टीम को देखकर जेसीबी भगाई गई और कर्मचारियों ने उसका पीछा किया। इसके बाद कर्मचारियों की तरफ जेसीबी चढ़ा दी गई। कर्मचारियों ने भागकर अपनी जान बचाई, जबकि सरकारी मोटरसाइकिल क्षतिग्रस्त हो गई।
अब सीसीटीवी फुटेज और मौके पर छोड़ी गई जेसीबी के आधार पर पुलिस की अगली कार्रवाई पर नजर है। साथ ही पहले दी गई शिकायत पर क्या कदम उठाए गए और अवैध खनन रोकने के लिए जिम्मेदार एनफोर्समेंट तंत्र ने क्षेत्र में अब तक क्या कार्रवाई की, इन सवालों के जवाब भी महत्वपूर्ण होंगे। पुलिस और एनफोर्समेंट विभाग का पक्ष सामने आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
Editor: गरिमा बागोतिया



