नारनौल | लॉजिस्टिक हब पर किसानों का पलटवार : पांच गांवों ने पहली बार खोला मोर्चा | बोले-हमने अपनी इच्छा से दी जमीन | झूठी राजनीति से विकास नहीं रुकने देंगे
नांगल चौधरी क्षेत्र के किसानों ने इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब का समर्थन किया और झूठे आरोपों को खंडन किया।

नारनौल। महेंद्रगढ़ जिले के नांगल चौधरी क्षेत्र में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब (आईएमएलएच) को लेकर पिछले कुछ समय से चल रहे विवाद के बीच गुरुवार को पहली बार पांच गांवों के किसान खुलकर सामने आए। बसीरपुर, तलोट, घाटाशेर, छिलरो सहित प्रभावित गांवों के किसानों ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर परियोजना का समर्थन करते हुए कहा कि लॉजिस्टिक हब को लेकर लगातार झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र के विकास कार्यों को प्रभावित करने का प्रयास हो रहा है। किसानों ने सीधे तौर पर इंजीनियर तेजपाल का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि वे लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसी बातें कह रहे हैं जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। 
किसानों ने कहा कि वे लंबे समय से मीडिया और सोशल मीडिया पर इस परियोजना को लेकर तरह-तरह के आरोप सुनते और पढ़ते आ रहे थे, लेकिन उन्होंने कभी सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी। अब जब लगातार किसानों के सम्मान, गांवों की एकता और विकास परियोजना पर सवाल उठाए जाने लगे तो उन्हें अपनी बात रखने के लिए सामने आना पड़ा। किसानों ने कहा कि प्रेसवार्ता में मौजूद अधिकांश लोग वही हैं जिन्होंने अपनी भूमि स्वेच्छा से सरकार को दी है। कुछ किसान ऐसे भी मौजूद थे जिनका मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन वे भी मानते हैं कि न्यायालय में अपनी बात रखना उनका संवैधानिक अधिकार है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए। 
प्रेसवार्ता के दौरान किसानों ने कहा कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि किसानों से जबरन हस्ताक्षर करवाए गए या उन्हें गुमराह कर जमीन ली गई। उन्होंने कहा कि वे पढ़े-लिखे लोग हैं और प्रत्येक दस्तावेज को पढ़ने तथा समझने के बाद ही अपनी सहमति दी गई। हजारों किसानों से किसी एक व्यक्ति द्वारा बहला-फुसलाकर हस्ताक्षर करा लेने जैसी बातें केवल लोगों को भ्रमित करने के लिए कही जा रही हैं। किसानों ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से जमीन दी और सरकार ने भूमि का पूरा मुआवजा सीधे उनके बैंक खातों में भेजा। किसी अधिकारी, कर्मचारी, नेता या बिचौलिए को कोई राशि नहीं दी गई। ऐसे में भ्रष्टाचार के आरोप तथ्यहीन और निराधार हैं।
किसानों ने बताया कि अधिग्रहण के समय उनकी अधिकांश भूमि का बाजार मूल्य लगभग 10 से 12 लाख रुपये प्रति एकड़ के आसपास था, जबकि सरकार ने उन्हें लगभग 30 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया। उन्होंने कहा कि वे इस मुआवजे से संतुष्ट हैं और इसी कारण उन्होंने बिना किसी दबाव के अपनी जमीन परियोजना के लिए उपलब्ध कराई। जिन किसानों को मुआवजे या अधिग्रहण प्रक्रिया पर आपत्ति थी, उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और उनका मामला आज भी विचाराधीन है। यह उनका कानूनी अधिकार है और उसका सम्मान होना चाहिए, लेकिन उससे उन किसानों की मंशा पर सवाल नहीं उठाया जा सकता जिन्होंने स्वेच्छा से अपनी जमीन दी है।
किसानों ने पूर्व सिंचाई मंत्री डॉ. अभय सिंह यादव पर लगाए जा रहे आरोपों को भी राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी परियोजना किसी एक व्यक्ति के स्तर पर नहीं लाई जा सकती। भूमि अधिग्रहण और परियोजना से जुड़े सभी निर्णय जिला प्रशासन, हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (HSIIDC), संबंधित विभागों, जनप्रतिनिधियों तथा सरकार की निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए गए। यदि सरकार ने मुआवजे की राशि सीधे किसानों के खातों में भेजी है तो भ्रष्टाचार का प्रश्न ही नहीं उठता। किसानों ने कहा कि केवल एक व्यक्ति को निशाना बनाकर राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास उचित नहीं है।
प्रेसवार्ता में किसानों ने यह भी कहा कि यदि वास्तव में भूमि अधिग्रहण में कोई बड़ा घोटाला या अनियमितता हुई होती तो पिछले लगभग आठ वर्षों तक कोई आवाज क्यों नहीं उठी। उन्होंने कहा कि अब परियोजना आगे बढ़ने के समय इसे विवादों में घसीटना दुर्भाग्यपूर्ण है। किसानों का कहना था कि कुछ बाहरी लोग गांवों में आकर ग्रामीणों को आंदोलन के लिए उकसा रहे हैं और गांवों के भाईचारे को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। गांवों के फैसले गांव के लोग स्वयं लेने में सक्षम हैं और बाहरी लोगों को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
किसानों ने कहा कि इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब केवल एक सरकारी परियोजना नहीं बल्कि दक्षिण हरियाणा के आर्थिक भविष्य की आधारशिला है। इसके निर्माण से महेंद्रगढ़ जिले में बड़े स्तर पर औद्योगिक निवेश आएगा, आधुनिक वेयरहाउस और लॉजिस्टिक पार्क विकसित होंगे, परिवहन नेटवर्क मजबूत होगा तथा हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन नहीं करना पड़ेगा और स्थानीय व्यापार को भी नई गति मिलेगी।
किसानों ने कहा कि यह परियोजना दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) के तहत विकसित की जा रही है। वर्ष 2016 में इसके लिए विशेष प्रयोजन कंपनी (SPV) का गठन किया गया था और वर्ष 2018 में केंद्र सरकार ने इसके प्रथम चरण को मंजूरी दी। लगभग 886 एकड़ भूमि पर विकसित की जा रही इस परियोजना के प्रथम चरण पर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत स्वीकृत की जा चुकी है। इसमें आधुनिक वेयरहाउस, कंटेनर टर्मिनल, रेल कनेक्टिविटी, ट्रक टर्मिनल और अन्य लॉजिस्टिक सुविधाएं विकसित की जानी हैं, जिससे महेंद्रगढ़ राष्ट्रीय स्तर के औद्योगिक और परिवहन मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करेगा।
किसानों ने न्यायालय में लंबित मामले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ किसानों ने अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर अदालत का रुख किया है। उनका मामला न्यायालय में विचाराधीन है और न्यायालय के आदेशों का सभी सम्मान करते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने संबंधित याचिकाकर्ताओं की भूमि के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। किसानों ने कहा कि जो लोग अदालत गए हैं, उन्हें न्याय मिलने का अधिकार है, लेकिन इससे उन किसानों की स्वैच्छिक सहमति पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए जिन्होंने अपनी इच्छा से जमीन दी और परियोजना का समर्थन कर रहे हैं।
अंत में किसानों ने सरकार से अपील की कि इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब के निर्माण में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न होने दी जाए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल पांच गांवों की नहीं बल्कि पूरे महेंद्रगढ़ और दक्षिण हरियाणा के भविष्य से जुड़ी है। इसे राजनीतिक विवादों से दूर रखकर समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए ताकि क्षेत्र के युवाओं को रोजगार, व्यापार को नई दिशा और जिले को विकास की नई पहचान मिल सके।
प्रेसवार्ता में किसान सुरेंद्र (बसीरपुर), सुभाष, रामपाल सहित पांच गांवों के बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे



