यदि हलवाई से बैर हो तो मिठाई को बुरी नहीं बतानी चाहिए : हरविन्द्र यादव के विश्लेषण में जल परियोजनाओं से लेकर मेडिकल कॉलेज, ढोसी रोपवे और लॉजिस्टिक हब तक के कार्यों का जिक्र किया गया है।
लाजिस्टिक हब की रेल लाइन के उद्घाटन के अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा नांगल चौधरी के पूर्व विधायक एवं पूर्व सिंचाई मंत्री डाक्टर अभय सिंह यादव के काम की प्रशंसा करने उपरांत संभवतः अभय विरोधियों को कुछ असहज लगा होगा। परंतु राजनीतिक निष्ठाओं से ऊपर उठ कर यदि निष्पक्ष भाव से डॉक्टर यादव के काम की समालोचना की जाए तो संभवतः किसी एक राजनीतिक व्यक्ति द्वारा दस साल की अवधि में इतना काम शायद ही कहीं किया गया होगा। इस व्यक्ति में इलाके के प्रति जो जुड़ाव और तड़प देखी है वह राजनीति में दुर्लभ है।
2014 आते आते सारे महेंद्रगढ जिले एवं विशेषकर नांगल चौधरी क्षेत्र में भूमिगत जल जिस चिंता जनक स्थिति में पहुँच गया था उससे अगला कदम क्षेत्र के लोगों द्वारा पलायन ही बचा था। इस व्यक्ति ने चुनाव जीतते ही एक जुनून के साथ इस समस्या को सामने से पकड़ा और इतने सुनियोजित तरीक़े से इसका समाधान निकाला कि पूरे जिले के लोग इसके मुरीद हो गए। जिस समस्या के समाधान के लिए हर चुनाव में केवल एसवाईएल नहर बनाने का नारा दिया जाता था, उस समस्या को एक साल के अंदर ही इस व्यक्ति ने चर्चा से बाहर कर दिया। यह काम अकेले नांगल चौधरी हल्के तक सीमित नहीं था अपितु समस्त जिले में एक ऐसी व्यवस्था बनायी जो धीरे-धीरे एक स्वचालित समाधान में बदल गई। बरसात में जब भी फालतू पानी नहरों में आता है अपने आप पूरे जिले में बनी हुई नादियों में बाँधों, जल भंडारों एवं जोहड़ों में स्वत: पहुँच जाता है।एक व्यक्ति की कल्पना ने डेरोली अहीर से केंद्रीय विश्वविद्यालय तक दोहान नदी को पानी से लबालब कर दिया जो सुदूर दक्षिण में बदोपुर राजस्थान बार्डर तक सजल हो गई है। दोहान नदी में बना देवनगर का बाँध व उसके साथ बनी लंबी झील आकर्षण केंद्र बनी हुई है । इसी तरह कृष्णावती नदी दोस्तपुर राजस्थान बॉर्डर से लेकर मानपुरा तक पानी से युक्त हो गई है। सुर्जनवास खेड़ा से पानी उठ कर अब मानपुरा होता हुआ रेवाड़ी के निमोठ गाँव के जोहड़ तक जा रहा है। इसी तरह भालखी से राता कलां नदी में पानी जा रहा है। राजस्थान बॉर्डर तक कांटी खेड़ी तक जोहड़ों में पानी पहुँच रहा है।नांगल चौधरी के गाोठड़ी से लेकर गोद बलाह तक दो दर्जन से अधिक गावों में पक्के जल भंडार बने हैं जो सर्दियों में किसानों की सरसों को भरपूर पानी दे रहे हैं। आलोचना तो किसी की भी की जा सकती है परंतु यह कोई सामान्य काम नहीं था। किसान की अर्थव्यवस्था में अमूल-चूल परिवर्तन करने वाला यह उस व्यक्ति का प्रयास था जो आपने क्षेत्र के किसान की तकलीफ़ को अपनी तकलीफ़ समझ में बैठा था। इस व्यक्ति ने इस इलाके को कभी हरा भरा पानी से भरपूर देखा था। परंतु जब यह इलाक़ा बर्बाद होता हुआ दिखाई दिया तो इस व्यक्ति के अंदर का दर्द समाधान ढूँढ कर लाया।
जहाँ तक अन्य विकास के कामों की बात है कोरियावास में नव स्थापित मेडिकल कॉलेज इस क्षेत्र के स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य है जो आज नहीं तो कल इस क्षेत्र को उच्च स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेगा। ढोसी के पहाड़ पर बन रहा रोपवे आने वाले समय में यहाँ पर्यटन का भविष्य साबित होगा। मुख्यमंत्री द्वारा जिस रेल लाइन का उद्घाटन किया है वह लाजिस्टिक हब जब पूरा आकार लेगा तो इस क्षेत्र में युवाओं को रोज़गार का एक नया आयाम लेकर आएगा । यह सब एक व्यक्ति की कल्पना थी, उसने एक सपना लिया था अपने इस पिछड़े क्षेत्र को आगे बढ़ाने का। और डॉक्टर यादव सौभाग्यशाली थे जिन को भगवान ने उनकी सोच के अनुसार काम करने का मौक़ा पूरे दस साल दिया। कहते हैं जब व्यक्ति के इरादे नेक होते हैं तो भगवान सारी कायनात को उसकी मदद के लिए धरती पर उतार देता है। इस व्यक्ति की मदद के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल एक फ़रिश्ते की तरह आकर खड़े हुए और उस शख्स ने इस व्यक्ति की कल्पना को न केवल पंख लगाए बल्कि उसके सपने को धरती पर साकार करने में अपना पूरा समर्थन सौंप दिया।
अन्त में इस सब से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि डॉक्टर यादव की व्यक्तिगत सोच जाति-पाति और व्यक्तिगत कुण्ठाओं से अलग थी। पूरे दस साल में इस व्यक्ति के अपने काम पर जातिवाद का प्रभाव नज़दीक भी नहीं आने दिया। जिस सुविधा की जिस गाँव के लिए ज़रूरत थी हर गाँव में वह सुविधा देने का उन्होंने भरपूर प्रयास किया। यही कारण है कि नांगल चौधरी हल्के के एक छोर से दूसरे छोर तक कहीं किसी विकास के काम में भेदभाव नज़र नहीं आता। उनकी दृढ इच्छाशक्ति की परीक्षा चुनाव के दौरान हुई जब वह चुनाव में चारों तरफ से जातिवाद के दुष्प्रचार से घिरे हुए थे तब भी उस व्यक्ति ने कभी अपने भाषण या विचारों में जातिवाद नाम तक नहीं लिया। उनके चुनाव के भाषण के कुछ अंश रिकॉर्ड पर हैं जब उन्होंने चुनाव की अंतिम घड़ी में भी यही कहा था कि उन्हें चुनाव हारना मंजूर है लेकिन जाति के नाम पर वोट की अपील नहीं करूँगा। चुनाव में हार जीत होती रहती है,घात प्रतिघात भी होते रहते हैं,व्यक्ति भी आते जाते रहते हैं, लेकिन कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं जो एक ऐसी छाप छोड़ते हैं जिसकी चर्चा आने वाली पीढ़ियाँ भी करती हैं ।
— हरविन्द्र यादव
Editor: State Desk



