एक सप्ताह में 32 साइबर ठग गिरफ्तार : ₹30.56 लाख बरामद | ₹7.25 लाख खातों में फ्रीज

साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत फरीदाबाद पुलिस ने एक सप्ताह के दौरान बड़ी कार्रवाई करते हुए 32 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार 15 से 21 अगस्त के बीच तीनों साइबर थानों की टीमों ने नौ अलग-अलग मामलों में कार्रवाई करते हुए आरोपितों को गिरफ्तार किया। इस दौरान ₹30 लाख 56 हजार की रकम बरामद की गई, जबकि साइबर ठगी से संबंधित 603 शिकायतों का निस्तारण करते हुए ₹7 लाख 25 हजार 172 की राशि विभिन्न खातों में फ्रीज कराई गई।
पुलिस उपायुक्त मुख्यालय हिमाद्री कौशिक के नेतृत्व में फरीदाबाद पुलिस के साइबर थानों की टीमें साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही हैं। पुलिस के मुताबिक ऑनलाइन निवेश, बैंकिंग और दूसरे माध्यमों से लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाले अपराधियों तथा उनसे जुड़े नेटवर्क की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस प्रवक्ता के अनुसार 15 से 21 अगस्त के बीच साइबर थाना एनआईटी में दर्ज दो, साइबर थाना सेंट्रल में दर्ज चार और साइबर थाना बल्लभगढ़ में दर्ज तीन मामलों में कार्रवाई की गई। इस तरह कुल नौ मामलों में 32 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी हुई।
इस अवधि में पुलिस टीमों ने आरोपितों और साइबर ठगी से जुड़े मामलों में ₹30,56,000 बरामद किए। इसके साथ ही साइबर अपराध से संबंधित प्राप्त शिकायतों पर भी कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार एक सप्ताह में 603 शिकायतों का निस्तारण किया गया और कार्रवाई करते हुए ₹7,25,172 की राशि संबंधित बैंक खातों में फ्रीज कराई गई।
पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपितों में शिव शंकर, अब्दुल हक, रजत कुमार, राहुल कुमार, आबिद, विनोद, अमित कुमार, अविनाश सिंह, सैकी सचदेवा, राजेश कुमार, सुनील कुमार, महेंद्र, सुरेंद्र, रौनक, राकेश पाल, शुभम राय, अमन दुबे, हमजा, कमरूद्दीन, जयेश राठोर, मोहित, सत्यम शर्मा, लवप्रीत सिंह, फहीम खान, मोहम्मद सलमान, विपिन कुमार, आकाश शर्मा, प्रियंका, रोहित बिष्ट, पवन कुमार और गौरव कुमार सहित अन्य आरोपित शामिल हैं।
पुलिस उपायुक्त मुख्यालय हिमाद्री कौशिक ने कहा कि साइबर ठग लोगों को अधिक मुनाफे और कम समय में ज्यादा पैसा कमाने का लालच देकर अपने जाल में फंसाने का प्रयास करते हैं। कई बार पर्याप्त जानकारी के बिना ऑनलाइन निवेश करने या किसी अनजान व्यक्ति की बातों पर भरोसा करने से लोग अपनी जमा पूंजी गंवा बैठते हैं।
उन्होंने लोगों से किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने की अपील की। किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निवेश करने से पहले उसकी पूरी जानकारी हासिल करने और केवल आधिकारिक माध्यम का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के साथ बैंक खाते, पासवर्ड, ओटीपी अथवा अन्य निजी और गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि बैंक या अन्य अधिकृत वित्तीय संस्थान फोन के माध्यम से ग्राहकों से ओटीपी, पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी नहीं मांगते। यदि कोई व्यक्ति बैंक अधिकारी या किसी संस्था का प्रतिनिधि बनकर इस तरह की जानकारी मांगता है तो उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है।
पुलिस उपायुक्त ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की जाने वाली ठगी से भी लोगों को सावधान किया। उन्होंने कहा कि कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई प्रावधान नहीं है। साइबर अपराधी पुलिस, जांच एजेंसी अथवा अन्य सरकारी संस्था का अधिकारी बनकर लोगों को डराने और उनसे रुपये ट्रांसफर कराने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल पुलिस को सूचना देनी चाहिए।
फरीदाबाद पुलिस ने लोगों से अपील की है कि साइबर ठगी का पता चलते ही बिना देरी राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। समय रहते शिकायत मिलने पर पुलिस और संबंधित एजेंसियों को ठगी की रकम को बैंक खातों में फ्रीज कराने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण है। ऑनलाइन निवेश, अधिक मुनाफे के ऑफर, संदिग्ध लिंक, अनजान कॉल और बैंकिंग जानकारी मांगने वाले संदेशों को लेकर सावधानी बरतकर साइबर ठगी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
फरीदाबाद पुलिस ने कहा कि साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। साइबर थानों की टीमें शिकायतों की जांच के साथ ठगी में इस्तेमाल बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और अन्य माध्यमों की भूमिका की जांच कर संबंधित आरोपितों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई कर रही हैं।
Editor: गरिमा बागोतिया



