साइबर ठगी पर पुलिस की चेतावनी : नई एडवाइजरी जारी | 10 अहम सावधानियां बताईं | सतर्क रहने की अपील

साइबर अपराधों में लगातार बढ़ोतरी और ठगों द्वारा अपनाए जा रहे नए तरीकों को देखते हुए पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल (आईपीएस) ने नागरिकों के लिए नई साइबर एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी रोज नए हथकंडे अपनाकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। थोड़ी सी लापरवाही किसी भी व्यक्ति की जीवनभर की कमाई को खतरे में डाल सकती है, इसलिए प्रत्येक नागरिक को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जिला पुलिस साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए लगातार कार्रवाई करने के साथ-साथ जनजागरूकता अभियान भी चला रही है। उन्होंने कहा कि यदि लोग समय रहते सावधानी बरतें तो अधिकांश साइबर अपराधों से बचा जा सकता है। एडवाइजरी में विशेष रूप से डिजिटल अरेस्ट, फर्जी केवाईसी अपडेट, निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर ठगी, स्क्रीन शेयरिंग ऐप, ओटीपी और बैंकिंग जानकारी साझा करने जैसी धोखाधड़ी से सावधान रहने की सलाह दी गई है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी पुलिस अधिकारी, सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग या अन्य सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को "डिजिटल अरेस्ट" नहीं करती। इसी प्रकार बैंक, आरबीआई या कोई सरकारी संस्था कभी भी फोन या मैसेज पर ओटीपी, एटीएम पिन, सीवीवी, नेट बैंकिंग पासवर्ड या यूपीआई पिन नहीं मांगती।
एडवाइजरी में लोगों से AnyDesk, TeamViewer और अन्य स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड नहीं करने, अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचने, फर्जी निवेश योजनाओं और सोशल मीडिया पर मिलने वाले पार्ट-टाइम जॉब ऑफर से सावधान रहने की अपील की गई है। इसके अलावा केवल विश्वसनीय वेबसाइटों से ऑनलाइन खरीदारी करने, क्यूआर कोड स्कैन करने से पहले सावधानी बरतने तथा सोशल मीडिया अकाउंट पर मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर धोखाधड़ी हो जाती है तो घबराने की बजाय तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही निकटतम साइबर थाना या संबंधित पुलिस थाना से तुरंत संपर्क करें। उन्होंने कहा कि "सतर्क नागरिक ही साइबर अपराधियों के विरुद्ध सबसे मजबूत सुरक्षा कवच हैं।"



