Yamunanagar News | गुरु नानक गर्ल्स कॉलेज में सजी शास्त्रीय संगीत की महफिल : चेतन जोशी ने किया बांसुरी वादन | छात्राओं ने लिया संगीत का आनंद

गुरु नानक गर्ल्स कॉलेज, संतपुरा में पायोनियर आर्ट्स एजुकेशन सोसायटी एवं आर्ट एंड कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन की ओर से ‘उत्तर-दक्षिण’ शास्त्रीय संगीत श्रृंखला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को एक मंच पर प्रस्तुत करने के साथ छात्राओं को देश की संगीत विरासत से जोड़ना रहा।
कार्यक्रम का आयोजन कॉलेज के जनरल सेक्रेटरी एमएस साहनी, निदेशिका डॉ. वरिंदर गांधी और प्रिंसिपल डॉ. सुखविंदर कौर के मार्गदर्शन में किया गया। डॉ. अम्बिका और डॉ. मनदीप कौर कार्यक्रम के संयोजक रहे, जबकि रितिका एवं ममता ने सह-संयोजक के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बांसुरी वादक चेतन जोशी की शास्त्रीय संगीत प्रस्तुति रही। उन्होंने बांसुरी की विभिन्न धुनों के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत की बारीकियों को श्रोताओं के सामने रखा। उनकी प्रस्तुति को छात्राओं और उपस्थित दर्शकों ने सराहा।
बांसुरी वादन के दौरान घटम पर शौनक बनर्जी और तबले पर उजित उदय कुमार ने संगत दी। अंजनाय जोशी ने भी प्रस्तुति में सहयोग किया। बांसुरी, घटम और तबले की संगत ने कार्यक्रम को विशेष बनाया और कलाकारों के तालमेल को दर्शकों ने खूब सराहा।
‘उत्तर-दक्षिण’ संगीत श्रृंखला के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत की अलग-अलग परंपराओं और शैलियों की झलक देखने को मिली। कलाकारों ने लय, ताल और संगीत की भावपूर्ण अभिव्यक्ति के माध्यम से छात्राओं को शास्त्रीय संगीत की विभिन्न विशेषताओं से परिचित कराया।
निदेशिका डॉ. वरिंदर गांधी ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत देश की सांस्कृतिक पहचान और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे कार्यक्रम छात्राओं को भारतीय संगीत परंपराओं से जोड़ने के साथ कला के प्रति उनकी रुचि बढ़ाने में भी सहायक होते हैं। उन्होंने शिक्षा के साथ कला और संस्कृति से जुड़ाव को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
प्रिंसिपल डॉ. सुखविंदर कौर ने कलाकारों, आयोजकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से छात्राओं को कलाकारों को करीब से सुनने और शास्त्रीय संगीत की बारीकियों को समझने का अवसर मिलता है।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं और अन्य उपस्थित लोगों में उत्साह देखने को मिला। आयोजकों ने कहा कि ‘उत्तर-दक्षिण’ शास्त्रीय संगीत श्रृंखला के माध्यम से भारतीय संगीत की विविधता और सांस्कृतिक एकता का संदेश देने का प्रयास किया गया।
Editor: शिवानी राजपूत



