शहीद की वीरांगना से मारपीट पर चार दोषियों को 10-10 साल की सजा : अदालत का सख्त फैसला | पीड़िता को मुआवजा देने के भी आदेश
देश की सीमा पर सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद के परिवार के साथ हुई मारपीट के मामले में महेंद्रगढ़ जिला अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। नांगल चौधरी उपमंडल के दोस्तपुर गांव में शहीद खुशीराम की बुजुर्ग वीरांगना के साथ हुई मारपीट और घर में घुसकर हमला करने के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) नितिन राज की अदालत ने चारों मुख्य आरोपियों को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 80-80 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की पूरी राशि पीड़ित वीरांगना को मुआवजे के रूप में देने के आदेश दिए गए हैं।
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार 12 अप्रैल 2025 को रोहित कुमार, विशाल कुमार, सुरेंद्र सिंह और राहुल कुमार कथित रूप से हथियारों के साथ शहीद के घर में घुस गए थे। आरोप है कि उन्होंने घर में मौजूद बुजुर्ग वीरांगना पर लाठी-डंडों से हमला किया और पूरे मोहल्ले में दहशत का माहौल बना दिया।
मामले में शुरुआत में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में वे जमानत पर रिहा हो गए। अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता विपिन कुमार बड़कोदा ने अदालत में आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड तथा अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर चारों आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
इस मामले में पुलिस की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में रही। पीड़ित वीरांगना के सैनिक पुत्र कृष्ण कुमार ने वारदात से पहले पुलिस अधीक्षक को संभावित हमले की आशंका से अवगत कराया था, लेकिन आरोप है कि समय रहते पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई। घटना के बाद ग्रामीणों के विरोध, महापंचायत और प्रदर्शन के पश्चात पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तेज की थी।
करीब 15 महीने तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले पर पीड़ित परिवार ने संतोष व्यक्त किया। परिवार का कहना है कि अदालत के इस निर्णय से अपराधियों को कड़ा संदेश जाएगा और शहीद परिवारों के सम्मान की रक्षा को मजबूती मिलेगी। मामले में प्रस्तुत सीसीटीवी फुटेज को अभियोजन पक्ष के महत्वपूर्ण साक्ष्यों में शामिल किया गया, जिसने न्यायालय के समक्ष घटनाक्रम को स्पष्ट करने में अहम भूमिका निभाई।



