Nuh News | नाबालिग से दुष्कर्म में 20 साल की सजा : दोषी पर 32 हजार जुर्माना | वीडियो प्रसारित करने का भी मामला

नूंह जिले की फास्ट ट्रैक स्पेशल पॉक्सो अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म, आपत्तिजनक वीडियो बनाकर प्रसारित करने और धमकी देने के मामले में दोषी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 32 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही पीड़िता को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. आशु संजीव तिंजन की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुनाया। अदालत के आदेश के अनुसार जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
मामला फिरोजपुर झिरका क्षेत्र में सितंबर 2023 में सामने आया था। शिकायत के अनुसार घटना के समय पीड़िता के परिवार के अन्य सदस्य घर से बाहर गए हुए थे। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले युवक पर नाबालिग के साथ यौन अपराध करने और उसे धमकाने का आरोप लगा था।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने घटना का आपत्तिजनक वीडियो बनाया और पीड़िता को इसके बारे में किसी को बताने पर वीडियो इंटरनेट पर प्रसारित करने की धमकी दी। बाद में वीडियो प्रसारित किए जाने का आरोप भी लगाया गया। मामला परिवार के संज्ञान में आने के बाद पुलिस को शिकायत दी गई।
शिकायत मिलने पर थाना फिरोजपुर झिरका पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाए और आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया।
इसके बाद मामला फास्ट ट्रैक स्पेशल पॉक्सो अदालत में चला। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से मामले से संबंधित साक्ष्य और गवाहियां अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गईं। उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।
सजा पर सुनवाई के बाद अदालत ने दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ 32 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया। जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त साधारण कारावास का प्रावधान भी आदेश में रखा गया है।
अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास और सहायता के मद्देनजर पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया। नाबालिग के खिलाफ अपराध होने के कारण मामले की सुनवाई पॉक्सो कानून के तहत गठित विशेष अदालत में हुई।
सितंबर 2023 में दर्ज मामले से लेकर अदालत का फैसला आने तक पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया चली। आखिरकार फास्ट ट्रैक स्पेशल पॉक्सो अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश साक्ष्यों के आधार पर दोषी को सजा सुनाई।
यह फैसला बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में पॉक्सो कानून के तहत होने वाली कठोर कानूनी कार्रवाई को भी रेखांकित करता है। साथ ही किसी नाबालिग से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री बनाना या प्रसारित करना भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
नाबालिग पीड़ितों की पहचान और निजता की सुरक्षा को देखते हुए मामले से संबंधित ऐसी कोई व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए, जिससे पीड़िता की पहचान उजागर हो सके।



