Ambala News | बंदी सिखों के मुद्दे पर वीरेश शांडिल्य का बयान : कानून और अदालत की प्रक्रिया का हो सम्मान | कट्टरपंथी ताकतों पर लगाए आरोप

बंदी सिखों की रिहाई को लेकर जारी बहस के बीच वीरेश शांडिल्य ने कहा कि प्रत्येक बंदी के मामले में कानून और अदालत की प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए, लेकिन इस मुद्दे की आड़ में आतंकवाद या कट्टरपंथ को बढ़ावा देने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
वीरेश शांडिल्य ने कहा कि बंदी सिखों से जुड़े मामलों का फैसला कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए। किसी व्यक्ति की रिहाई या सजा से संबंधित विषय पर संविधान, कानून और न्यायालय की व्यवस्था के तहत ही निर्णय लिया जाना उचित है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कट्टरपंथी ताकतें बंदी सिखों के मुद्दे को भावनात्मक रंग देकर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि उन्होंने अपने बयान में इन कथित ताकतों को लेकर कोई विशिष्ट तथ्य या नाम सामने नहीं रखा। उनके इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
शांडिल्य ने कहा कि पंजाब और देश में शांति तथा कानून-व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण है। आतंकवाद किसी भी विचारधारा या धर्म के नाम पर हो, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे को हिंसा या कट्टरपंथ को बढ़ावा देने का माध्यम नहीं बनने दिया जाना चाहिए।
उन्होंने धार्मिक भावनाओं के सम्मान की बात करते हुए कहा कि प्रत्येक धर्म और समुदाय की भावनाओं का सम्मान किया जाना जरूरी है। इसके साथ ही धर्म के नाम पर हिंसा या आतंकवाद को उचित ठहराने की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
शांडिल्य ने कहा कि बंदी सिखों से जुड़े मामलों को भावनाओं के बजाय कानून के दायरे में देखा जाना चाहिए। यदि किसी मामले में कानूनी राहत का आधार बनता है तो उसका निर्णय सक्षम अदालत और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पंजाब लंबे समय से शांति और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है और ऐसी स्थिति में सामाजिक सौहार्द बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। किसी भी विवादित मुद्दे पर ऐसी भाषा और गतिविधियों से बचा जाना चाहिए, जिससे समाज में तनाव पैदा होने की आशंका हो।
बंदी सिखों की रिहाई के मुद्दे पर अलग-अलग पक्षों की अपनी मांगें और तर्क हैं। वीरेश शांडिल्य ने इस बहस के बीच कानून और न्यायिक प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की बात कही है तथा कट्टरपंथ और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की मांग की है।
Editor: शिवानी राजपूत



