Yamunanagar News | श्री गुरु तेग बहादुर जी की विरासत पर राष्ट्रीय संगोष्ठी : विद्वानों ने जीवन, बलिदान और साहित्यिक योगदान पर की चर्चा

साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से गुरु नानक खालसा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, हरियाणा के सहयोग से यमुनानगर स्थित गुरु नानक खालसा कॉलेज के प्रांगण में “श्री गुरु तेग बहादुर जी की विरासत” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस की पवित्र स्मृति में आयोजित की गई। कार्यक्रम में प्रख्यात विद्वानों, लेखकों, शिक्षाविदों तथा साहित्यिक और शैक्षिक समुदाय से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया।
संगोष्ठी के दौरान विद्वानों ने श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, दर्शन, बलिदान, साहित्यिक योगदान तथा उनकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया गया। इसके बाद वंदे मातरम, राष्ट्रगान और अतिथियों के सम्मान का कार्यक्रम हुआ।
साहित्य अकादमी के उप-सचिव डॉ. एन. सुरेश बाबू ने उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने साहित्यिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक चर्चाओं के माध्यम से श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन और विरासत से निरंतर जुड़ने के महत्व पर जोर दिया। इस अवसर पर भारत सरकार के संस्कृति मंत्री का संदेश भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के आयोजन के महत्व को रेखांकित किया गया।
केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के चांसलर प्रो. हरमोहिंदर सिंह बेदी ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शिरकत की और मुख्य भाषण दिया। उन्होंने श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन और बलिदान पर प्रकाश डालते हुए मानवीय मूल्यों के संरक्षण तथा आस्था और अंतरात्मा की स्वतंत्रता की रक्षा में उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत के सभ्यतागत इतिहास में गुरु जी का बलिदान एक विशेष स्थान रखता है।
इस अवसर पर गुरु नानक खालसा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष सरदार मेजर आर. एस. भट्टी, महासचिव सरदार बलवंत सिंह बांगा, वित्त सचिव सरदार अमरदीप सिंह और सदस्य डॉ. कमलप्रीत कौर भी मौजूद रहे।
साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक ने अध्यक्षीय भाषण दिया। उन्होंने श्री गुरु तेग बहादुर जी की विरासत के साहित्यिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर चर्चा की। उद्घाटन सत्र का समापन गुरु नानक खालसा कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अरविंदर सिंह भल्ला के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के शैक्षणिक सत्र में दो विद्वतापूर्ण सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र की अध्यक्षता डॉ. अरविंदर सिंह भल्ला ने की। इसमें एस. अवतार सिंह, एस. मंजिंदर सिंह और डॉ. लेज़िया लखवीर ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। प्रस्तुतियों में श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, विचारों, साहित्यिक योगदान और ऐतिहासिक महत्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
दूसरे सत्र की अध्यक्षता प्रसिद्ध पंजाबी लेखक श्री रविंदर सिंह ने की। इस सत्र में डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. अनुराग सिंह और डॉ. दलविंदर सिंह ग्रेवाल ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने भारत की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत में श्री गुरु तेग बहादुर जी के योगदान तथा उनकी शिक्षाओं की निरंतर प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे।
संगोष्ठी का समापन केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के चांसलर प्रो. हरमोहिंदर सिंह बेदी की अध्यक्षता में आयोजित समापन सत्र के साथ हुआ। साहित्य अकादमी के उप-सचिव डॉ. एन. सुरेश बाबू ने समापन भाषण दिया और साहित्य, शिक्षा तथा निरंतर शैक्षणिक जुड़ाव के माध्यम से श्री गुरु तेग बहादुर जी के मूल्यों और बौद्धिक विरासत को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रसिद्ध पंजाबी विद्वान और लेखक श्री बलकार सिंह ने भी समापन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के महत्व तथा भारत के आध्यात्मिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक इतिहास में उनके स्थायी स्थान पर विचार व्यक्त किए। प्रो. हरमोहिंदर सिंह बेदी ने समकालीन समय में श्री गुरु तेग बहादुर जी के संदेश की प्रासंगिकता पर जोर दिया।
गवर्निंग बॉडी और मैनेजिंग कमेटी के अध्यक्ष सरदार रणदीप सिंह जौहर ने भी अपना संदेश दिया। उन्होंने राष्ट्रीय संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं और श्री गुरु तेग बहादुर जी की शाश्वत विरासत एवं शिक्षाओं को संरक्षित करने और उनके प्रसार के महत्व पर प्रकाश डाला।
सत्र का समापन साहित्य अकादमी के उप-सचिव श्री नवीन कुमार के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि, वक्ताओं, विद्वानों, प्रबंध समिति के सदस्यों, मेजबान संस्थान और कार्यक्रम के सफल आयोजन से जुड़े सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। इस दौरान गणमान्य व्यक्तियों का सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम का संचालन साहित्य अकादमी की डॉ. संदीप कौर ने गुरु नानक खालसा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के डॉ. तिलक राज और डॉ. विनय चंदेल के साथ मिलकर किया। कार्यक्रम में डॉ. अमित जोशी, डॉ. कुमार गौरव, श्री ओम पाहवा, सरदार गुरदयाल सिंह निमर, डॉ. एनएस विर्क, एस. अजिंदरपाल सिंह, श्री राहुल कोहली, श्री सुरेश, श्री हरभजन सहित अन्य विशिष्ट अतिथि तथा गुरु नानक खालसा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के शिक्षण और गैर-शिक्षण सदस्य मौजूद रहे।
यह राष्ट्रीय संगोष्ठी श्री गुरु तेग बहादुर जी की विरासत और विशेष रूप से उनकी शहादत की 350वीं वर्षगांठ के संदर्भ में अकादमिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक चर्चा के लिए महत्वपूर्ण मंच रही।
Editor: शिवानी राजपूत



