Yamunanagar News | धान खरीद से पहले राइस मिलर्स ने खोला मोर्चा : पुराने बकाए के भुगतान की मांग | नीति स्पष्ट होने तक समझौते से इनकार
हरियाणा में धान की फसल कटाई के लिए तैयार होने और कुछ क्षेत्रों में कटाई शुरू होने के बीच राइस मिलर्स और सरकार के बीच समझौते को लेकर असमंजस बना हुआ है। यमुनानगर में राइस मिल एसोसिएशन की विशेष बैठक में मिलर्स ने पुराने बकाए के भुगतान और नई नीति को स्पष्ट किए जाने तक सरकार के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करने का निर्णय लिया है। दूसरी ओर किसान संगठन सरकार से धान की सरकारी खरीद जल्द शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
राइस मिल एसोसिएशन की बैठक में आगामी धान खरीद सीजन, सरकार के साथ होने वाले समझौते, पुराने भुगतान और मिलों में पड़े सरकारी चावल के उठान सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कहा कि पिछले दो से तीन वर्षों से उनके विभिन्न भुगतान सरकार की तरफ लंबित हैं। इस संबंध में अधिकारियों के सामने कई बार मामला उठाया जा चुका है, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ।

राइस मिल एसोसिएशन के प्रधान मनीष बंसल सहित प्रवीण बट्टार, सचिन अग्रवाल और मुनीश कंबोज ने मीडिया के सामने मिलर्स की समस्याएं रखीं। एसोसिएशन का कहना है कि पुराने वित्तीय मामलों का समाधान किए बिना नए खरीद सीजन के लिए मिलर्स से समझौते की उम्मीद करना उचित नहीं है।
मिलर्स ने दावा किया कि पिछले दो से तीन वर्षों का उनका बकाया भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। उनका कहना है कि अधिकारियों को बार-बार भुगतान जारी करने के लिए कहा गया, लेकिन मामला लंबित है। इसी कारण मिल संचालकों में नाराजगी है और अब एसोसिएशन ने सामूहिक रूप से अपनी मांग सरकार के सामने रखने का फैसला किया है।

एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने मिलों में पड़े सरकारी चावल के उठान का मुद्दा भी उठाया। उनका दावा है कि सरकार से संबंधित करीब 80 प्रतिशत चावल का अभी तक मिलों से उठान नहीं हुआ है। मिलर्स का कहना है कि इस संबंध में भी संबंधित अधिकारियों से कई बार अनुरोध किया गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया।
बैठक में नई राइस मिलिंग नीति को लेकर भी चर्चा की गई। एसोसिएशन का कहना है कि नई नीति और उसकी शर्तों को मिलर्स के सामने स्पष्ट रूप से रखा जाना चाहिए। जब तक नीति से जुड़े विषयों पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती और पुराने लंबित मामलों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक मिलर्स सरकार के साथ नए सीजन के लिए समझौता नहीं करेंगे।

मिलर्स के इस रुख के बीच धान उत्पादक किसानों की चिंता भी बढ़ रही है। धान की फसल तैयार होने के बाद किसानों को सरकारी खरीद शुरू होने का इंतजार है। किसान संगठनों की ओर से पहले ही सरकार से खरीद प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग की जा चुकी है, ताकि कटाई के बाद किसानों को फसल बेचने में परेशानी का सामना न करना पड़े।
राइस मिल एसोसिएशन का कहना है कि सरकार को खरीद सीजन शुरू होने से पहले मिलर्स से जुड़े पुराने मामलों का समाधान करना चाहिए। मिलर्स ने बकाया भुगतान, चावल के उठान और नई नीति की शर्तों को स्पष्ट करने को प्रमुख मुद्दा बनाया है। इन पर समाधान होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पर विचार करने की बात कही गई है।
दूसरी तरफ किसानों का कहना है कि खेतों में धान की फसल तैयार हो चुकी है और कटाई का काम भी शुरू होने लगा है। ऐसे में सरकारी खरीद को लेकर स्थिति जल्द स्पष्ट होनी चाहिए। किसानों की मांग है कि सरकार राइस मिलर्स के साथ बातचीत कर विवादित मुद्दों का समाधान करे और धान खरीद की तारीख तथा व्यवस्था स्पष्ट करे।
फिलहाल राइस मिल एसोसिएशन और सरकार के बीच नए सीजन को लेकर समझौते की स्थिति स्पष्ट नहीं है। एसोसिएशन ने अपनी शर्तें सामने रख दी हैं और पुराने भुगतान होने तक समझौते से इनकार किया है। हालांकि धान खरीद की आधिकारिक घोषणा में देरी का कारण केवल मिलर्स से समझौता नहीं होना है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
अब नजर सरकार और राइस मिलर्स के बीच होने वाली बातचीत पर है। खरीद सीजन नजदीक होने के कारण मिलर्स की मांगों और किसानों की चिंता दोनों का समाधान समय पर होना महत्वपूर्ण है। सरकार की ओर से धान खरीद और मिलिंग व्यवस्था पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आगामी खरीद सीजन की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
Editor: शिवानी राजपूत



