नारनौल। एमबीबीएस पढ़ाई या मज़ाक: न फैकल्टी, न मरीज । महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने मंत्री सहित सरकार के अधिकारियों को भेजी ईमेल

रामचन्द्र सैनी
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महेंद्रगढ़ (नारनौल )

महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज
महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज

महर्षि च्यवन सरकारी मेडिकल कॉलेज के प्रथम वर्ष के एमबीबीएस छात्रों ने हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री को विस्तृत पत्र लिखकर कॉलेज की बदहाल स्थिति उजागर की है। छात्रों का यह पत्र सत्ता और विपक्ष के सभी नेताओं को करारा जवाब है जो इस मेडिकल कॉलेज की सुविधाओं पर चुप्पी साधे हुए हैं और नामकरण के मुद्दे पर बड़े बड़े बयान देते हैं।

फैकल्टी, लैब और बेसिक सुविधाओं की कमी को लेकर छात्रों ने उठाई आवाज, पत्र में गिनाई समस्याएं।

फैकल्टी, लैब और बेसिक सुविधाओं की कमी को लेकर छात्रों ने उठाई आवाज, पत्र में गिनाई समस्याएं।

 ईमेल से भेजे पत्र की प्रतियां

छात्रों ने स्वास्थ्य मंत्री के साथ-साथ मुख्य सचिव हरियाणा सरकार, सचिव, नेशनल मेडिकल कमीशन, अध्यक्ष नेशनल मेडिकल कमीशन, अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग हरियाणा, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग,हरियाणा तथा कुलपति, पं. बी.डी. शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, रोहतक को भी प्रेषित किया है।

 छात्रों का कहना है कि जिस संस्थान से वे डॉक्टर बनने का सपना लेकर जुड़े, वहां बुनियादी संसाधनों, फैकल्टी और क्लिनिकल सुविधाओं का भारी अभाव है।

छात्रों के अनुसार, कॉलेज में सभी विभागों में सीनियर फैकल्टी (प्रोफेसर/एसोसिएट प्रोफेसर) की 100% कमी है। लैब तकनीशियन और सहायक स्टाफ के अभाव में प्रयोगशालाएं ठप पड़ी हैं, जिससे पढ़ाई केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित होकर रह गई है। एनाटॉमी विभाग में कैडेवर तक उपलब्ध नहीं, जबकि हिस्टोलॉजी स्लाइड्स, एम्ब्रायोलॉजी मॉडल और स्केलेटन जैसे जरूरी संसाधनों का भी अभाव है। फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री विभागों में लैब उपकरण, केमिकल्स और ग्लासवेयर की कमी के कारण प्रैक्टिकल कार्य नहीं हो पा रहा। छात्रों का कहना है कि इससे उनकी बुनियादी मेडिकल ट्रेनिंग अधूरी रह रही है।

महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज की बदहाल स्थिति को दर्शाता छात्रों का विस्तृत ईमेल दस्तावेज।

महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज की बदहाल स्थिति को दर्शाता छात्रों का विस्तृत ईमेल दस्तावेज।

पत्र में सबसे गंभीर स्थिति अस्पताल की बताई गई है। पत्र में आरोप है कि आईपीडी सेवाएं बंद हैं, ऑपरेशन थिएटर चालू नहीं हैं और इमरजेंसी सेवाएं भी उपलब्ध नहीं। ओपीडी में भी रोजाना बहुत कम मरीज आ रहे हैं, जिससे छात्रों को क्लिनिकल अनुभव बिल्कुल नहीं मिल पा रहा। एक्स रे, एम आर ई, सीटी स्कैन और ब्लड बैंक जैसी आवश्यक सेवाएं भी शुरू नहीं हो पाई हैं। छात्रों ने बार-बार बिजली कटौती को भी बड़ी समस्या बताया है, जिससे अस्पताल और हॉस्टल दोनों प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा, हॉस्टल में सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अनाधिकृत प्रवेश की घटनाएं सामने आने का दावा किया गया है। बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। छात्रों के अनुसार, कॉलेज की लाइब्रेरी में एक भी किताब नहीं है, कैंटीन और कैफेटेरिया बंद हैं, खेल सुविधाएं और जिम उपलब्ध नहीं हैं। यहां तक कि कैंपस में स्टेशनरी और जरूरी सामान तक की व्यवस्था नहीं है।

कम्युनिटी मेडिसिन के तहत होने वाले फैमिली अडॉप्शन प्रोग्राम और पीएचसी और सीएचसी की विजिट भी अब तक शुरू नहीं किए गए हैं, जिससे छात्रों का फील्ड अनुभव प्रभावित हो रहा है। छात्रों ने पत्र में कहा कि यह स्थिति नेशनल मेडिकल कमीशन के मानकों का उल्लंघन है।

 

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