फतेहाबाद। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद कमाल : थाइलैंड में दो कांस्य पदक जीते | फतेहाबाद के सतबीर ने बढ़ाया देश का मान

रिपोर्टर: राजेश भाम्भू
| हरियाणा
थाइलैंड में पदक जीतने के बाद तिरंगा उठाए हुए फतेहाबाद के गांव सिरढ़ान निवासी सतबीर गिजरोइया।
थाइलैंड में पदक जीतने के बाद तिरंगा उठाए हुए फतेहाबाद के गांव सिरढ़ान निवासी सतबीर गिजरोइया।

फतेहाबाद। हरियाणा के गांव सिरढ़ान निवासी सतबीर गिजरोइया ने संघर्ष और हौसले की मिसाल पेश करते हुए थाइलैंड में आयोजित दूसरी पेटांक ट्रांसप्लांट एशियन ओपन चैंपियनशिप 2026 में दो कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। यह उपलब्धि इसलिए और खास है क्योंकि कुछ साल पहले उनकी दोनों किडनियां फेल हो गई थीं और पिता के जीवनदान से ही उनकी जिंदगी बच सकी थी।

थाइलैंड में मेडल प्राप्त करते गांव सिरढ़ान निवासी सतबीर गिजरोइया।

थाइलैंड में मेडल प्राप्त करते गांव सिरढ़ान निवासी सतबीर गिजरोइया।

29 अप्रैल से 3 मई तक बैंकॉक में आयोजित इस चैंपियनशिप में 9 देशों के 85 खिलाड़ियों ने भाग लिया। भारतीय टीम के 14 खिलाड़ियों ने कुल 6 पदक जीते, जिनमें सतबीर ने मेन्स सिंगल्स के नेशन्स ग्रुप और एशियन ग्रुप में दो ब्रोंज मेडल अपने नाम किए।

सतबीर के बड़े भाई सुनील गिजरोइया के अनुसार, वर्ष 2019 में उनकी दोनों किडनियां खराब हो गई थीं, जिसके बाद पिता रणजीत सिंह ने अपनी किडनी दान कर उनका जीवन बचाया। जयपुर में सफल ट्रांसप्लांट के बाद सतबीर ने नई जिंदगी की शुरुआत की और साथियों के प्रेरित करने पर पेटांक खेल से जुड़ गए।

बीए तक शिक्षित सतबीर गांव में सीएससी सेंटर चलाते हैं और रोजाना सुबह-शाम खेल मैदान में अभ्यास करते हैं। सुबह 5:30 से 7 बजे और शाम 5 से 7 बजे तक वह नियमित अभ्यास कर अपनी फिटनेस और खेल कौशल को निखारते हैं। इससे पहले भी वे थाइलैंड और जर्मनी में बेहतर प्रदर्शन कर चुके हैं।

क्या है पेटांक खेल

पेटांक में खिलाड़ी स्टील की गेंदों को एक छोटी लकड़ी की गेंद (जैक) के सबसे करीब फेंकते हैं। यह खेल सख्त मिट्टी या बजरी पर खेला जाता है और 1vs1, 2vs2 या 3vs3 प्रारूप में खेला जा सकता है। जो टीम अपने गोले जैक के सबसे करीब पहुंचाती है, वही अंक हासिल करती है और आमतौर पर 13 अंक तक पहुंचने वाली टीम विजेता बनती है।

सतबीर की यह सफलता न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी है, बल्कि यह भी साबित करती है कि मजबूत इरादों के सामने कठिनाइयां भी हार मान जाती हैं।

Edit By: शिवानी राजपूत
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