नारनौल | परिवार से समाज तक जिम्मेदारी निभाने वाली रेणु दहिया बनीं चर्चा का केंद्र : पांच साल के भतीजे को बेटे से बढ़कर पालकर IIT पहुंचाया

रिपोर्टर: हरविन्द्र यादव
| नारनौल
रेणु दहिया
रेणु दहिया

नारनौल | सैनी सभा के चुनाव में इस बार महासचिव पद को लेकर एक ऐसी महिला प्रत्याशी चर्चा के केंद्र में बनी हुई हैं, जिन्होंने समाज सेवा का संकल्प लेने से पहले अपने निजी और पारिवारिक जीवन में जिम्मेदारी, त्याग और समर्पण की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा अब पूरे समाज में हो रही है। सैनी सभा के इतिहास में पहली बार महिला प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरीं रेणु दहिया लगातार लोगों के बीच आकर्षण और विश्वास का केंद्र बनी हुई हैं।

जेईई एडवांस में नारनौल के पुनीत ने लहराया परचम, परिवार और क्षेत्र का नाम किया रोशन।

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रेणु दहिया केवल चुनावी वादों के सहारे आगे बढ़ने वाली प्रत्याशी नहीं हैं, बल्कि उन्होंने अपने जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए परिवार और रिश्तों को जिस मजबूती से संभाला, वह आज समाज के लिए प्रेरणा बन चुका है। समाज के लोग उनके जीवन संघर्ष और पारिवारिक समर्पण को उनकी सबसे बड़ी ताकत मान रहे हैं।
जानकारी के अनुसार रेणु दहिया और उनकी बड़ी बहन की शादी एक ही परिवार में हुई थी। लेकिन एक सड़क दुर्घटना में उनकी बड़ी बहन के पति, जो रेणु दहिया के जेठ थे, की अचानक मृत्यु हो गई। कुछ महीने बाद रेणु दहिया के ससुर का बीमारी के चलते निधन हो गया था। इन दोनों हादसे के बाद पूरा परिवार गहरे संकट में आ गया। बाद में दोनों परिवार की सहमति से उनकी बड़ी बहन का पुनर्विवाह कर दिया गया, लेकिन उस समय बड़ी बहन का लगभग पांच वर्षीय पुत्र पुनीत सबसे बड़ी चिंता का विषय था।

जेडीईई मेन्स में 99.29 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले पुनीत को मिठाई खिलाकर खुशी मनाते परिजन।

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ऐसे कठिन समय में रेणु दहिया ने केवल रिश्तेदारी का फर्ज नहीं निभाया बल्कि उस मासूम बच्चे को अपने बेटे की तरह अपनाकर उसकी पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। उन्होंने अपने दो छोटे बेटों के साथ-साथ पुनीत का पालन-पोषण भी पूरी ममता और समर्पण से किया। परिवार की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने बच्चों की शिक्षा से कभी समझौता नहीं किया।

रेणु दहिया ने पुनीत को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए। उनकी मेहनत और त्याग का परिणाम यह रहा कि आज वही बच्चा देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान Indian Institute of Technology (ISM) Dhanbad में CSC trade लेकर अध्ययन कर रहा है। पुनीत ने ऑल इंडिया स्तर पर 834वीं रैंक प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज का नाम रोशन किया है। समाज के लोग इसे रेणु दहिया की परवरिश, संघर्ष और शिक्षा के प्रति समर्पण का परिणाम मान रहे हैं।

यह भी उल्लेखनीय है कि रेणु दहिया के अपने दोनों बेटे भी शिक्षा के क्षेत्र में लगातार मेहनत कर रहे हैं और वर्तमान में सीकर में कोचिंग प्राप्त कर रहे हैं। उनके बड़े बेटे ने हाल ही में आयोजित हुई NEET परीक्षा में आंसर-की के अनुसार लगभग 654 अंक प्राप्त किए हैं। हालांकि फिलहाल परीक्षा रद्द होने के कारण पुनः होनी है, लेकिन परिवार की शिक्षा के प्रति गंभीरता और समर्पण साफ दिखाई देता है।

समाज के प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि जो महिला अपने परिवार में इतनी बड़ी जिम्मेदारी निभाकर एक बच्चे का भविष्य संवार सकती है, वह समाज और सभा की जिम्मेदारियों को भी पूरी ईमानदारी, संवेदनशीलता और दूरदृष्टि के साथ निभाने में सक्षम है। यही कारण है कि सैनी समाज में रेणु दहिया को लेकर सकारात्मक माहौल लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है।

रेणु दहिया का कहना है कि यदि समाज के लोग उन्हें महासचिव पद की जिम्मेदारी सौंपते हैं तो वे विशेष रूप से महिलाओं के उत्थान, बेटियों की शिक्षा, जरूरतमंद बच्चों के मार्गदर्शन और समाज में शिक्षा के स्तर को मजबूत करने के लिए कार्य करेंगी। उनका मानना है कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति शिक्षा और संस्कारों से ही संभव है।

Edit By: शिवानी राजपूत
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