Ambala News | बकरा मंडी का ₹6.5 करोड़ में टेंडर : शुल्क वसूली का व्यापारियों ने किया विरोध

अंबाला शहर के रूपो माजरा स्थित मिट्ठू की मंडी में भेड़-बकरियों की खरीद-बिक्री से जुड़ा नया टेंडर शुरू होने के साथ ही विवाद खड़ा हो गया है। टेंडर लेने वाले ज्ञान सिंह के मुताबिक इसकी राशि करीब साढ़े छह करोड़ रुपये है। वहीं मंडी में पहुंचे कई व्यापारियों और पशुपालकों ने प्रति पशु लिए जा रहे शुल्क का विरोध करते हुए सरकार से टेंडर रद्द करने की मांग की है।
अंबाला शहर में लगने वाली बकरा मंडी में हर महीने हरियाणा के साथ पंजाब, चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में व्यापारी भेड़-बकरियों की खरीद-बिक्री के लिए पहुंचते हैं। मंडी में होने वाले कारोबार से जुड़े शुल्क की वसूली के लिए टेंडर जारी किया गया है। इसे पंजाब के राजपुरा निवासी ज्ञान सिंह ने लिया है।

ज्ञान सिंह ने बताया कि भेड़-बकरियों की खरीद-बिक्री से संबंधित टेंडर सोमवार से शुरू हुआ है और इसकी राशि साढ़े छह करोड़ रुपये है। उनके अनुसार सरकारी शर्तों में चार प्रतिशत शुल्क का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि फिलहाल खरीदने वाले से 300 रुपये प्रति पशु और बेचने वाले से 100 रुपये प्रति पशु लिए जाने का प्रावधान है, जबकि 10 रुपये एंट्री फीस है।
ज्ञान सिंह ने दावा किया कि व्यापारियों की परेशानी को देखते हुए उनकी ओर से राहत देने का प्रयास किया गया है। उन्होंने बताया कि व्यापारियों के साथ बातचीत के बाद खरीददार से लिया जाने वाला शुल्क 300 रुपये से घटाकर 150 रुपये प्रति पशु करने का निर्णय लिया गया है।
दूसरी तरफ मंडी में पहुंचे व्यापारियों ने इस शुल्क का विरोध किया। जींद-कुरुक्षेत्र क्षेत्र से आए दिलीप कुमार ने कहा कि भेड़-बकरी का कारोबार करने वाले लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि करीब दो साल पहले भी इस तरह का टेंडर हुआ था और विरोध के बाद तत्कालीन मंत्री अनिल विज के समक्ष मामला उठाया गया था, जिसके बाद इसे बंद कर दिया गया था।
दिलीप कुमार ने कहा कि पहले 100 रुपये की पर्ची लगती थी, जबकि अब 300 रुपये प्रति पशु शुल्क की बात सामने आई है। उन्होंने सरकार से टेंडर को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि भेड़-बकरी पालन और खरीद-बिक्री से बड़ी संख्या में छोटे पशुपालक एवं व्यापारी जुड़े हुए हैं।
चंडीगढ़ से मंडी पहुंचे मेवा लाल ने भी शुल्क का विरोध किया। उन्होंने दावा किया कि वह पिछले 20 से 30 वर्षों से यहां भेड़-बकरियों की खरीद के लिए आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले इस तरह का शुल्क नहीं देना पड़ता था और अब प्रति पशु 300 रुपये की पर्ची से कारोबार प्रभावित होगा।
चंडीगढ़ से आए शम्मी कुमार ने भी कहा कि वह लंबे समय से इस मंडी से जुड़े हैं। उनके अनुसार चंडीगढ़, पेहवा, कैथल और हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों से व्यापारी यहां पशुओं की खरीद के लिए आते हैं। उन्होंने भी नए शुल्क को वापस लेने की मांग की।
मोहाली से आए नीरज कुमार ने भी शुल्क को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने दावा किया कि अतिरिक्त शुल्क से व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और इसका असर पशुओं की कीमत पर भी पड़ सकता है। व्यापारियों ने शुल्क को लेकर कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए इसे अनुचित वसूली बताया है, हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
एक तरफ टेंडर धारक ज्ञान सिंह व्यापारियों को निर्धारित दर में राहत देने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर व्यापारी पूरे शुल्क और टेंडर व्यवस्था को ही वापस लेने की मांग कर रहे हैं। टेंडर की राशि, सरकारी नियमों के तहत निर्धारित शुल्क और वसूली की शर्तों को लेकर संबंधित विभाग या प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।



