Kurukshetra News | जन्माष्टमी को लेकर सजे बाजार और मंदिर : 4 सितंबर को मनेगा पर्व | रोहिणी नक्षत्र का रहेगा संयोग

भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में तैयारियां तेज हो गई हैं। बाजारों में जन्माष्टमी से जुड़ी खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ बढ़ने लगी है, वहीं मंदिरों को भी आकर्षक तरीके से सजाया जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली से जुड़ी धार्मिक परंपराओं के साथ गीता की भूमि कुरुक्षेत्र में भी जन्माष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है।
इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर को मनाया जाएगा। राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित एवं प्राचीन श्री दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के पीठाध्यक्ष पंडित प्रेम कुमार शर्मा के अनुसार इस बार जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा की स्थिति का विशेष संयोग रहेगा। उन्होंने बताया कि 4 सितंबर को अष्टमी तिथि रात 12 बजकर 24 मिनट तक रहेगी।

जन्माष्टमी नजदीक आने के साथ कुरुक्षेत्र के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की पोशाक, मुकुट, बांसुरी, पालना और पूजा से जुड़ी सामग्री खरीद रहे हैं। मंदिरों में भी जन्माष्टमी के कार्यक्रमों की तैयारियां की जा रही हैं। भगवान के बाल स्वरूप के श्रृंगार और झांकियों को लेकर विशेष व्यवस्था की जा रही है।
पंडित प्रेम कुमार शर्मा ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण हुआ था। भगवान श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन धर्म, कर्म और कर्तव्य का संदेश देता है।

कुरुक्षेत्र का भगवान श्रीकृष्ण से विशेष संबंध माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार महाभारत युद्ध से पहले इसी भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था। यही कारण है कि धर्मनगरी में जन्माष्टमी को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिलता है।
पंडित प्रेम कुमार शर्मा ने बताया कि गृहस्थ परंपरा में श्रद्धालु अष्टमी तिथि पर व्रत और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं। वहीं वैष्णव परंपरा में जन्माष्टमी के साथ अगले दिन मनाए जाने वाले नंदोत्सव का भी विशेष महत्व है।
उन्होंने बताया कि जन्माष्टमी पर श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का अभिषेक और श्रृंगार करते हैं। लड्डू गोपाल के लिए पालना सजाया जाता है और पूजा-अर्चना व आरती के बाद भोग अर्पित किया जाता है। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करते हैं।
पंडित प्रेम कुमार शर्मा के मुताबिक सनातन परंपरा में चंद्र दर्शन के बाद जन्माष्टमी व्रत खोलने की मान्यता भी है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय का समय अलग रहेगा। उनके अनुसार कुरुक्षेत्र और चंडीगढ़ में रात 11 बजकर 21 मिनट, दिल्ली और जालंधर में 11 बजकर 24 मिनट तथा मथुरा में रात 11 बजकर 26 मिनट पर चंद्रोदय होने का अनुमान है।
इसी तरह उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार अयोध्या और वाराणसी में रात 11 बजकर 9 मिनट, प्रयागराज में 11 बजकर 14 मिनट, पटियाला में करीब 11 बजकर 22 मिनट और जम्मू में 11 बजकर 29 मिनट पर चंद्रोदय होगा। अलग-अलग स्थानों पर समय में कुछ मिनट का अंतर रहेगा।
उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के साथ उनके द्वारा दिए गए धर्म और कर्म के संदेश को याद करने का अवसर भी है। जन्माष्टमी को लेकर अब धर्मनगरी के मंदिरों और बाजारों में उत्साह लगातार बढ़ रहा है और श्रद्धालु पर्व की तैयारियों में जुटे हैं।
Editor: शिवानी राजपूत



