रेवाड़ी सफाई टेंडर विवाद: 29 करोड़ का ठेका, 62 दिन बाद भी व्यवस्था फेल, नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल

सुरेंद्र गौड़
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रेवाड़ी

रेवाड़ी में 29 करोड़ सफाई टेंडर फेल, 62 दिन बाद भी कूड़ा व्यवस्था बदहाल
रेवाड़ी में 29 करोड़ सफाई टेंडर फेल, 62 दिन बाद भी कूड़ा व्यवस्था बदहाल

रेवाड़ी शहर में घर-घर कूड़ा उठान और कूड़ा निष्पादन के लिए 8 फरवरी को 5 वर्षों के लिए 29 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया था, लेकिन टेंडर जारी होने के 62 दिन बाद भी शहर की सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट पाई है। शहर में अब यह चर्चा तेज है कि आखिर किसकी सरपरस्ती में टेंडर लेने वाली एजेंसी लापरवाही बरत रही है।

टेंडर की शर्तों के अनुसार ठेका लेने वाली एजेंसी को 48 नई टिपर (लाइट मोटर व्हीकल) और करीब दो दर्जन ई-रिक्शा खरीदने थे, लेकिन आरोप है कि ठेकेदार ने नियमों को ताक पर रख दिया है। नए वाहनों की बजाय दूसरे जिलों में वर्षों से उपयोग हो चुकी पुरानी और कंडम गाड़ियां लाकर काम चलाया जा रहा है। ये गाड़ियां न तो तकनीकी मानकों पर खरी उतरती हैं और न ही प्रदूषण नियमों का पालन करती हैं।

आरटीए और प्रदूषण विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि 62 दिन बीतने के बावजूद इन गाड़ियों की जांच तक नहीं की गई। टेंडर में स्पष्ट था कि सभी वाहन प्रदूषण रहित और मानकों के अनुरूप होने चाहिए, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है।

कूड़ा उठान की प्रक्रिया में भी भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग करने के बजाय एक ही गाड़ी में डाला जा रहा है, जबकि नियमों के अनुसार अलग व्यवस्था होनी चाहिए। गाड़ियों में केवल ऊपर एंगल लगाकर खानापूर्ति की जा रही है।

डंपिंग यार्ड से राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर ऑडी गांव के पास कूड़ा निष्पादन स्थल तक कूड़ा ले जाने के लिए डंपर की बजाय कृषि कार्य में उपयोग होने वाले ट्रैक्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। आरोप है कि कई बार ट्रैक्टर चालक कूड़ा निर्धारित स्थान तक ले जाने के बजाय सड़कों के किनारे ही डालकर चले जाते हैं।

रेवाड़ी सफाई टेंडर विवाद

रेवाड़ी सफाई टेंडर विवाद

टेंडर की शर्तों के अनुसार हर गाड़ी पर सहायक होना अनिवार्य था, लेकिन मौके पर एक भी सहायक दिखाई नहीं देता। इसके अलावा सातों दिन 24 घंटे सेवा देने की शर्त के बावजूद कई वार्डों में कूड़ा गाड़ियां 2 से 3 दिन बाद पहुंच रही हैं, जिससे शहर में कूड़े के ढेर लग गए हैं।

इस मामले पर लक्ष्मण यादव ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह अधिकारियों की जिम्मेदारी है। सरकार केवल संसाधन उपलब्ध कराती है, जबकि योजनाओं को लागू करना प्रशासन का काम है। उन्होंने कहा कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को ठीक किया जाएगा और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करना नगर परिषद की जिम्मेदारी है।

वहीं कांग्रेस के शहरी प्रधान प्रवीण चौधरी ने आरोप लगाया कि रेवाड़ी शहर कूड़ा घर बन चुका है। उन्होंने कहा कि मुख्य मार्गों से लेकर वार्डों तक कूड़े के ढेर लगे हुए हैं और इस संबंध में वे नगर परिषद के कार्यकारी अभियंता अंकित वशिष्ठ को लिखित शिकायत दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि 29 करोड़ रुपए की बड़ी राशि के बावजूद जनता को बुनियादी सुविधा नहीं मिल रही और पूरे मामले में मिलीभगत की आशंका है। उन्होंने सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग की, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर किसकी सरपरस्ती में यह पूरा खेल चल रहा है।

कुल मिलाकर 62 दिन बीतने के बाद भी टेंडर की शर्तों का पालन नहीं होना और सफाई व्यवस्था का चरमराना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि इस मामले में ठोस कार्रवाई होती है या यह विवाद भी कागजों तक सीमित रह जाता है।

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