Yamunanagar News | फसल अवशेष न जलाने की अपील : 60 किसानों को दी प्रबंधन की जानकारी | मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने पर जोर

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कृषि विज्ञान केंद्र दामला की ओर से गांव बैंडी में फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर ग्राम स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में करीब 60 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया और फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों की जानकारी ली।
कृषि विज्ञान केंद्र दामला के समन्वयक डॉ. संदीप रावल ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि फसल अवशेष खेत में बचा केवल अपशिष्ट नहीं है, बल्कि इसमें कार्बनिक पदार्थ और पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इनका सही तरीके से प्रबंधन कर दोबारा मिट्टी में शामिल करने से मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाने, मिट्टी की संरचना सुधारने और पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में सहायता मिलती है। उन्होंने किसानों से फसल अवशेष जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से उनका प्रबंधन करने की अपील की।
सस्य विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. अराधना बाली ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खेत में उपलब्ध अवशेषों की मात्रा, अगली फसल, उपलब्ध समय और खेत की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उचित तकनीक का चयन करना चाहिए।

किसानों को फसल अवशेषों को खेत में मिलाने, मल्चिंग और इनके बेहतर उपयोग के लिए इस्तेमाल होने वाली कृषि मशीनरी के बारे में भी बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि उचित प्रबंधन से मिट्टी में जैविक पदार्थ के संरक्षण, पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण और कृषि उत्पादन की दीर्घकालिक स्थिरता में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़ी तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं को विशेषज्ञों के सामने रखा। कृषि वैज्ञानिकों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की सलाह दी।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को फसल अवशेषों को बोझ के बजाय खेत की उपयोगी संपदा के रूप में देखने के लिए प्रेरित करना और पराली जलाने के स्थान पर वैज्ञानिक एवं टिकाऊ प्रबंधन को बढ़ावा देना रहा।
Editor: शिवानी राजपूत



