Yamunanagar News | नए विचारों को शोध से जोड़कर बदलाव लाएं संस्थान : छात्राओं ने देखा ऑनलाइन व्याख्यान | नवाचार-उद्यमिता पर जोर

डीएवी गर्ल्स कॉलेज में इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) की ओर से छात्राओं के लिए ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया। शिक्षा मंत्रालय के नवाचार प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित व्याख्यान का विषय उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान एवं नवाचार के पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को शोध, नवाचार और उद्यमिता के महत्व के साथ नए विचारों को व्यावहारिक समाधान में बदलने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के रणनीतिक गठबंधन प्रभाग की टीम से शाहिना और प्रेक्षा ने संस्थागत स्तर पर अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी साझा की। कॉलेज की आईआईसी उपाध्यक्ष डॉ. सुनीता कौशिक और कनवीनर विवेक ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

शाहिना ने कहा कि बदलते समय में उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका केवल विद्यार्थियों को डिग्री और किताबी ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। शिक्षण संस्थानों को अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता और सामाजिक बदलाव के प्रभावी केंद्र के रूप में विकसित करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के पास अनेक नए विचार होते हैं, लेकिन उन विचारों को उचित दिशा, संसाधन और मंच उपलब्ध कराना भी जरूरी है। जब नए विचारों को शोध के साथ जोड़कर व्यावहारिक रूप दिया जाता है तो वे समाज की समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
व्याख्यान में सरकार की ओर से उच्च शिक्षण संस्थानों की संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने के लिए शुरू की गई मंथन और उत्थान जैसी पहलों की जानकारी भी दी गई। शाहिना ने बताया कि मंथन के माध्यम से नए विचारों और समस्याओं के समाधान को लेकर विचार-विमर्श किया जाता है, जबकि उत्थान के जरिए इन विचारों को आगे बढ़ाकर विकास और परिवर्तन की दिशा देने का प्रयास किया जाता है।
उन्होंने शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के नए विचारों को व्यावहारिक एवं प्रभावशाली समाधानों में बदलने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। छात्राओं को समझाया गया कि किसी नए विचार को केवल अवधारणा तक सीमित रखने के बजाय उसके व्यावहारिक उपयोग और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
प्रेक्षा ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को उद्योग और समाज की वर्तमान जरूरतों को समझते हुए अपने शोध कार्यों को दिशा देनी चाहिए। इससे शोध केवल अकादमिक स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसके परिणामों का उपयोग वास्तविक समस्याओं के समाधान में भी किया जा सकेगा।
उन्होंने सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। शिक्षण संस्थान, उद्योग और समाज मिलकर शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में काम करें तो बेहतर परिणाम सामने आ सकते हैं। इससे विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को व्यावहारिक अनुभव मिलने के साथ नए अवसर भी उपलब्ध हो सकते हैं।
कार्यक्रम में छात्राओं को उद्यमिता के क्षेत्र में नवाचार की भूमिका के बारे में भी बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि नए विचारों को विकसित कर उन्हें उपयोगी उत्पाद, सेवा अथवा समाधान का रूप दिया जा सकता है। इसके लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में ऐसा वातावरण तैयार होना चाहिए, जहां विद्यार्थियों को प्रयोग और नवाचार के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
कॉलेज की इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल की ओर से आयोजित इस गतिविधि का उद्देश्य छात्राओं में शोध एवं नवाचार के प्रति रुचि विकसित करना और उन्हें बदलते शैक्षणिक एवं औद्योगिक परिवेश से परिचित कराना रहा।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. परमेश कुमार, डॉ. शिखा और ममता थापर ने सहयोग दिया। कॉलेज प्रबंधन ने छात्राओं को भविष्य में भी शोध, नवाचार और उद्यमिता से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया।



