Ateli News | खासपुर में गोचर-खेल मैदान की जमीन पर विवाद : मंदिर की आड़ में कब्जे का आरोप | ग्रामीणों ने पैमाइश की मांग की

गांव खासपुर में गोचर भूमि और खासपुर स्पोर्ट्स क्लब की जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। गांव के लोगों ने जमीन के इस्तेमाल, मंदिर निर्माण और खेल मैदान की स्थिति को लेकर अलग-अलग सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस जमीन को बच्चों के खेल और पशुओं के चरने के लिए इस्तेमाल किया जाना था, वहां धीरे-धीरे निर्माण कर कब्जे की स्थिति बनाई जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि खासपुर स्पोर्ट्स क्लब के नाम पर आने वाले चंदे और अनुदान का उपयोग मैदान के विकास में दिखाई नहीं दे रहा है। आरोप है कि मैदान में आज तक बच्चों के लिए दौड़ने का ट्रैक तक नहीं बनाया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की मौके पर जांच कराने की मांग की है।

धानक समाज से जुड़े युवा शमशेर ने आरोप लगाया कि यह जमीन पहले स्पोर्ट्स क्लब के नाम पर थी, लेकिन अब यहां शनि मंदिर बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को मंदिर बनाने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उनका आरोप है कि मंदिर निर्माण की आड़ में धीरे-धीरे पूरी गोचर भूमि पर कब्जा किया जा रहा है।
शमशेर ने यह भी आरोप लगाया कि फॉरेस्ट विभाग की जमीन के आसपास तारबंदी कर जमीन को रोक दिया गया है। उन्होंने बताया कि वह पशुपालन का काम करते हैं और गोचर भूमि कम होने के कारण बकरी-भेड़ पालने वाले लोगों को अपने पशुओं को चराने के लिए दूसरे गांवों में ले जाना पड़ता है। उनके अनुसार, वहां भी कई बार पशुओं को चराने से रोक दिया जाता है।

शमशेर ने अरावली क्षेत्र में बने गहरे गड्ढों को मिट्टी डालकर भरने की मांग भी उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि जातिगत आधार पर उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन की ओर से इस संबंध में पक्ष सामने आना बाकी है।
गांव निवासी रमेश कुमार उर्फ रुपेश पुत्र भूप सिंह ने बताया कि वर्ष 2018 में गांव और बच्चों के सहयोग से एक संस्था शुरू की गई थी, जिसका नाम खासपुर स्पोर्ट्स क्लब रखा गया। उनके अनुसार क्लब बनाने का उद्देश्य आर्मी भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं, दौड़ लगाने वाले खिलाड़ियों और मैदान में घूमने वाले बच्चों को सुविधा उपलब्ध कराना था।

रमेश ने बताया कि बच्चों की आस्था को देखते हुए मैदान के एक कोने में बजरंगबली की छोटी मूर्ति स्थापित की गई थी। उन्होंने कहा कि मूर्ति का अनावरण गांव के लोगों की मौजूदगी में हुआ था और दीवार पर लगा शिलालेख आज भी मौजूद है, जिसमें सहयोग करने वाले ग्रामीणों के नाम दर्ज हैं।
रमेश का आरोप है कि करीब सात साल बाद अब वह पुरानी बजरंगबली की मूर्ति वहां नहीं है और उसकी जगह बड़ा शनि मंदिर बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को किसी भी धार्मिक स्थल से आपत्ति नहीं है, लेकिन पुरानी मूर्ति को हटाया जाना उचित नहीं है। उन्होंने मंदिर की जमीन और उसकी सीमा स्पष्ट करने की मांग की।
ग्रामीणों ने खासपुर स्पोर्ट्स क्लब को मिलने वाले सरकारी अनुदान को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि क्लब के नाम से हर साल अनुदान मिलने के बावजूद मैदान में आज तक बच्चों के लिए दौड़ने का ट्रैक नहीं बनाया गया। ग्रामीणों के अनुसार मैदान की खराब स्थिति के कारण करीब एक महीने पहले एक हादसा भी हो चुका है।

ग्रामीणों का कहना है कि खेल मैदान की स्थिति सुधारने के बजाय जमीन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि यदि मैदान को सही तरीके से विकसित किया जाए तो गांव के युवाओं और बच्चों को खेल तथा सेना भर्ती की तैयारियों में इसका लाभ मिल सकता है।
मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर जमीन की पैमाइश कराएं, मंदिर की सीमा निर्धारित करें और यह स्पष्ट करें कि किस हिस्से की जमीन किस उपयोग के लिए दर्ज है।
ग्रामीणों ने गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के साथ-साथ खासपुर स्पोर्ट्स क्लब की जमीन को खेल मैदान के रूप में विकसित करने की मांग की है। उनका कहना है कि जमीन के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की जांच के बाद ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
Editor: शिवानी राजपूत



