Kanina News | बंद DAV संस्थान को दोबारा शुरू करने की मांग : 58 एकड़ भूमि का मुद्दा | शिक्षा-कौशल विकास का प्रस्ताव
पिछले कई वर्षों से बंद पड़े डीएवी शिक्षण संस्थान को दोबारा शुरू करने अथवा संस्था द्वारा इसे पुनः संचालित नहीं किए जाने की स्थिति में इसकी भूमि का जनहित में शिक्षा और कौशल विकास के लिए उपयोग सुनिश्चित करने की मांग उठी है। कनीना के कस्बावासियों और समाजसेवियों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन एसडीएम कार्यालय में उप अधीक्षक अनिल कुमार को दिया गया।
ज्ञापन देने वालों में शामिल कस्बावासी एवं समाजसेवी हरेंद्र शर्मा ने बताया कि कनीना नगर पालिका की करीब 58 एकड़ भूमि पूर्व में शिक्षण संस्थान के संचालन के उद्देश्य से डीएवी संस्था को दी गई थी। इस भूमि पर लंबे समय तक शैक्षणिक गतिविधियां संचालित हुईं और क्षेत्र के विद्यार्थियों को शिक्षा का लाभ मिला। वर्तमान में संस्थान लंबे समय से बंद और निष्क्रिय पड़ा होने के कारण इतनी बड़ी भूमि और उससे संबंधित संसाधनों का अपेक्षित शैक्षणिक उपयोग नहीं हो पा रहा है।

हरेंद्र शर्मा ने कहा कि कनीना और आसपास के क्षेत्र के विद्यार्थियों के व्यापक हित को देखते हुए इस मामले में गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत है। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है कि नगर पालिका के उपलब्ध मूल रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित भूमि की लीज अवधि, उसकी शर्तों और वर्तमान कानूनी स्थिति की जांच करवाई जाए, ताकि भूमि और संस्थान के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।
उन्होंने मांग की कि डीएवी संस्था को लिखित रूप से पत्र भेजकर पूछा जाए कि वह पूर्व में संचालित शिक्षण संस्थान को दोबारा शुरू करने के लिए तैयार है या नहीं। यदि संस्था दोबारा शिक्षण कार्य शुरू करने के लिए तैयार है तो उससे विस्तृत कार्ययोजना मांगी जाए। इस कार्ययोजना में भवन और स्टाफ की व्यवस्था, विद्यार्थियों के प्रवेश, संस्थान शुरू करने की प्रस्तावित तिथि और अन्य आवश्यक बिंदुओं की जानकारी शामिल हो।

ज्ञापन में कहा गया है कि यदि डीएवी संस्था शिक्षण संस्थान का संचालन करने में असमर्थ है या इसे दोबारा शुरू करने की इच्छुक नहीं है तो नगर पालिका द्वारा लीज पर दी गई भूमि को नियमानुसार वापस लेकर उसका उपयोग जनहित में सुनिश्चित किया जाए। कस्बावासियों का कहना है कि इतनी बड़ी भूमि और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग क्षेत्र में शिक्षा तथा युवाओं के कौशल विकास से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए किया जा सकता है।
ज्ञापन में इस भूमि पर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, आधुनिक एवं डिजिटल लाइब्रेरी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अध्ययन केंद्र, कंप्यूटर एवं डिजिटल शिक्षा केंद्र, कौशल विकास एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र विकसित करने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही खेल एवं शारीरिक प्रशिक्षण की सुविधाएं तथा विज्ञान और कंप्यूटर प्रयोगशालाएं विकसित करने की मांग भी रखी गई है।

हरेंद्र शर्मा ने कहा कि यदि भूमि और उपलब्ध संसाधनों का उचित तरीके से इस्तेमाल किया जाता है तो इसका फायदा केवल कनीना के विद्यार्थियों को ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों और युवाओं को भी मिल सकता है। उन्हें बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं के साथ कौशल विकास और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए स्थानीय स्तर पर संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।
ज्ञापन में पूरे मामले के अध्ययन और समाधान के लिए पांच से सात सदस्यीय समिति गठित करने की मांग भी की गई है। प्रस्ताव के अनुसार समिति में नगर पालिका के प्रतिनिधियों के साथ शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिक प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। समिति उपलब्ध रिकॉर्ड, भूमि की स्थिति और भविष्य में इसके संभावित उपयोग का अध्ययन कर पारदर्शी तथा जनहितकारी निर्णय लेने में सहयोग कर सकती है।
इस मौके पर हरेंद्र शर्मा, पार्षद एडवोकेट दीपक चौधरी, पार्षद योगेश कुमार, पार्षद प्रतिनिधि मनीष कुमार, मुकेश कुमार और संजय सहित अन्य लोग मौजूद रहे। ज्ञापन सौंपने वालों ने सरकार से मामले पर गंभीरता से विचार करते हुए बंद पड़े शिक्षण संस्थान और संबंधित भूमि का विद्यार्थियों तथा क्षेत्र के हित में उपयोग सुनिश्चित करने की मांग की।



