Satnali News | जन्माष्टमी पर आधी रात मनेगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव : गूंजेंगे जयकारे | माखन-मिश्री का लगेगा भोग

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व जन्माष्टमी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। संदीप शास्त्री ने बताया कि जन्माष्टमी पर श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करने के साथ व्रत रखते हैं और रात 12 बजे भगवान के जन्म का उत्सव मनाते हैं। इस दौरान मंदिरों में विशेष सजावट और झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
उन्होंने बताया कि आधी रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय मंदिरों में शंख और घंटियों की गूंज के बीच श्रद्धालु जयकारे लगाएंगे। इस दौरान ‘नंद के घर आनंद भयो’ के उद्घोष के साथ भगवान के जन्म की खुशी मनाई जाएगी।
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का विशेष श्रृंगार करने की परंपरा है। जन्मोत्सव के बाद भगवान के बाल स्वरूप को स्नान करवाकर नए वस्त्र धारण करवाए जाते हैं। इसके बाद माखन-मिश्री का भोग लगाकर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया जाता है।
संदीप शास्त्री के अनुसार धार्मिक मान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री प्रिय माना जाता है। इसी कारण जन्माष्टमी के अवसर पर माखन-मिश्री का भोग लगाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। श्रद्धालु घरों में भी भगवान श्रीकृष्ण की पूजा कर जन्मोत्सव मनाते हैं।
जन्माष्टमी से जुड़ी परंपराएं देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग रूप में दिखाई देती हैं। हरियाणा सहित उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में इसके आसपास गोगाजी से जुड़ी धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं। वहीं महाराष्ट्र में दही-हांडी उत्सव विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है।
दही-हांडी उत्सव में युवा समूह बनाकर मानव पिरामिड तैयार करते हैं और ऊंचाई पर बांधी गई मटकी तक पहुंचने का प्रयास करते हैं। दूसरी ओर हरियाणा में स्थानीय लोक परंपराओं के अनुसार गोगाजी की पूजा-अर्चना की जाती है।
अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में जन्माष्टमी मनाने के तरीके भले ही अलग हों, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है। मंदिरों और घरों में पूजा-अर्चना के साथ जन्माष्टमी का पर्व धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं के बीच मनाया जाता है।
Editor: State Desk



