Faridabad News | CBI अधिकारी बनकर 1.24 करोड़ की ठगी : 6 आरोपी गिरफ्तार | अब तक 13 गिरफ्तारी

खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर एक वरिष्ठ नागरिक से 1 करोड़ 24 लाख 45 हजार रुपये की साइबर ठगी करने के मामले में साइबर थाना सेंट्रल की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रौनक पाल, राकेश पाल, शुभम राय, अमन दुबे, ओमकार और रणजीत के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार सभी आरोपी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इस मामले में पहले सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और अब तक कुल 13 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
पुलिस प्रवक्ता के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ओमकार और रणजीत कथित तौर पर बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ से युवाओं को बुलाकर उनके माध्यम से फर्म के बैंक खाते खुलवाते थे। आरोप है कि बाद में इन खातों को साइबर ठगी करने वाले लोगों को उपलब्ध कराया जाता था। वहीं आरोपी अमन दुबे पर फर्म के लिए जगह और आवश्यक कागजात तैयार करवाने में भूमिका निभाने का आरोप है।
पुलिस जांच के अनुसार शुभम, राकेश और रौनक कथित तौर पर विदेश में बैठे साइबर ठगों के साथ टेलीग्राम के माध्यम से संपर्क में थे। पुलिस का कहना है कि इनके मोबाइल फोन में थर्ड पार्टी ऐप मौजूद थे, जिनके माध्यम से फोन का एक्सेस ठगों तक पहुंचता था। ठगी की वारदात के समय ओटीपी प्राप्त करने के लिए सिम को फोन में डालकर रखा जाता था और इसके बाद उसे निकाल दिया जाता था। पुलिस इन तथ्यों और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
मामला फरीदाबाद के सेक्टर-85 निवासी एक वरिष्ठ नागरिक की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि 30 मार्च को उसके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया और दावा किया कि शिकायतकर्ता के नाम से बेंगलुरु में एक बैंक खाता संचालित हो रहा है।
आरोप है कि कॉल करने वाले व्यक्ति ने शिकायतकर्ता से कहा कि कथित बैंक खाते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में हुआ है। इसके बाद शिकायतकर्ता को गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाया गया। ठगों ने कथित जांच और सत्यापन के नाम पर उसके बैंक खातों और संपत्ति से जुड़ी धनराशि निर्धारित खातों में जमा करवाने का दबाव बनाया।
शिकायत के मुताबिक साइबर ठगों ने दावा किया कि यह प्रक्रिया आरबीआई और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार की जा रही है तथा जांच पूरी होने के बाद पूरी राशि वापस कर दी जाएगी। आरोपियों ने अपने दावों को विश्वसनीय दिखाने के लिए आरबीआई, आयकर विभाग और सर्वोच्च न्यायालय की मुहर वाले कथित फर्जी दस्तावेज भी शिकायतकर्ता को भेजे।
इन बातों के झांसे में आकर शिकायतकर्ता ने अप्रैल 2026 में अपने अलग-अलग बैंक खातों से विभिन्न खातों में कुल 1 करोड़ 24 लाख 45 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। शिकायतकर्ता को बाद में ठगी का पता तब चला, जब उसने अपनी धनराशि वापस लेने के लिए संबंधित लोगों से संपर्क करने का प्रयास किया और उनके मोबाइल नंबर बंद मिले।
इसके बाद पीड़ित ने पुलिस को शिकायत दी। साइबर थाना सेंट्रल में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और अन्य तकनीकी तथ्यों के आधार पर मामले से जुड़े लोगों की पहचान और गिरफ्तारी की कार्रवाई आगे बढ़ाई।
पुलिस प्रवक्ता के मुताबिक इस मामले में सात आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था। अब छह और आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ मामले में पकड़े गए आरोपियों की कुल संख्या 13 हो गई है। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों की कथित भूमिका और ठगी के पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
पुलिस की जांच में अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ठगी की रकम किन-किन खातों से होकर आगे भेजी गई और इस नेटवर्क में अन्य कौन लोग शामिल हैं। मामले में सामने आए तथ्यों के आधार पर साइबर थाना सेंट्रल की जांच जारी है।



