नारनौल | 32 लाख के नाला सफाई टेंडर पर उठे सवाल : गंदगी निकालकर फिर नालों में डाल रहे ठेकेदार!

रिपोर्टर: रामचन्द्र सैनी
| नारनौल

नारनौल | शहर में बरसात से पहले नालों की सफाई को लेकर नगर परिषद की तैयारियों पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 32 लाख रुपए के नाला सफाई टेंडर में काम शुरू होते ही लापरवाही और लीपापोती के आरोप सामने आने लगे हैं। लोगों का आरोप है कि ठेकेदार सफाई के नाम पर केवल दिखावा कर रहे हैं और निकाली गई गंदगी को नालों के किनारे छोड़ दिया जा रहा है, जो दोबारा नालों में ही वापस जा रही है।

नारनौल में नाला सफाई के दौरान निकाली गई गंदगी को किनारे छोड़ने पर उठे सवाल।

नारनौल में नाला सफाई के दौरान निकाली गई गंदगी को किनारे छोड़ने पर उठे सवाल।

नगर परिषद द्वारा इस बार दो अलग-अलग ठेके छोड़े गए हैं। इनमें एक ठेका हुडा सेक्टर क्षेत्र के नालों की सफाई के लिए जबकि दूसरा पूरे शहर के नालों की सफाई के लिए दिया गया है। शहर के नालों की सफाई का लगभग 18 लाख रुपए का ठेका संजय कुमार नामक ठेकेदार को दिया गया है।

शहर के नेताजी सुभाष स्टेडियम के सामने और आसपास के नालों की सफाई के दौरान जो तस्वीरें सामने आई हैं, उन्होंने पूरे कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नालों से निकाली गई कीचड़ और कचरे को वहीं किनारे पर डाल दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गंदगी धीरे-धीरे वापस नालों में जा रही है और यदि हल्की बारिश भी हो जाए तो पूरा कचरा दोबारा पानी के साथ नालों में बह जाएगा।

नालों से निकाली गई कीचड़ दोबारा नालों में जाने का आरोप, लोगों ने जताई नाराजगी।

नालों से निकाली गई कीचड़ दोबारा नालों में जाने का आरोप, लोगों ने जताई नाराजगी।

लोगों का कहना है कि हर साल बरसात से पहले लाखों रुपए खर्च कर नालों की सफाई करवाई जाती है, लेकिन हालात हर बार वही रहते हैं। सफाई के कुछ दिन बाद ही नाले फिर से जाम होने लगते हैं और शहर के कई हिस्सों में जलभराव की समस्या खड़ी हो जाती है।

स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार केवल जेसीबी से गंदगी निकालकर किनारे डाल देते हैं, जबकि नियम अनुसार उस गंदगी को तुरंत ट्रॉली में भरकर निर्धारित स्थान तक पहुंचाया जाना चाहिए। लोगों का कहना है कि ट्रॉली को वाटरप्रूफ तिरपाल से ढककर गंदगी उठाई जाए ताकि रास्ते में या दोबारा नालों में कीचड़ न गिरे। लेकिन ऐसा करने से खर्च बढ़ता है, इसलिए ठेकेदार केवल खानापूर्ति करके अपना मुनाफा बचाने में लगे रहते हैं।

लोगों ने नगर परिषद अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अधिकारी मौके पर जाकर निरीक्षण नहीं करते और केवल कागजों में काम पूरा दिखा दिया जाता है। कई लोगों ने यह मांग भी उठाई कि जिस वार्ड में नालों की सफाई हो रही है, वहां के पार्षद और नगर परिषद अध्यक्ष को भी मौके पर निगरानी करनी चाहिए ताकि कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।

शहरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते नालों की सही तरीके से सफाई नहीं हुई तो बरसात के दिनों में एक बार फिर नारनौल को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ेगा। खास बात यह है कि नेताजी सुभाष स्टेडियम के पास की हालत को लोग इस पूरे सफाई अभियान की असल तस्वीर बता रहे हैं।

वहीं इस मामले में नगर परिषद के संबंधित जेई विकास कुमार का कहना है कि यदि सफाई के बाद गंदगी दोबारा नालों में जाती पाई गई तो ठेकेदार से दोबारा सफाई करवाई जाएगी। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि आखिर नगर परिषद हर साल लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद नाला सफाई व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी क्यों नहीं बना पा रही।

Edit By: शिवानी राजपूत
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