सरकार का कर्मचारियों के वेतन कटौती का फैसला कर्मचारी विरोधी: पुंडीर

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मंडी, 23 मार्च (GZN)

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व प्रांत महामंत्री डॉ. मामराज पुंडीर ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन कटौती करके चलने वाली सरकार पहली बार देखी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा ए एवं बी श्रेणी के कर्मचारियों के वेतन में प्रतिमाह 3 प्रतिशत कटौती का प्रस्ताव दुर्भाग्यपूर्ण और अव्यावहारिक निर्णय है। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल कर्मचारी विरोधी है, बल्कि सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

डॉ. पुंडीर ने कहा कि प्रदेश का कर्मचारी वर्ग पहले ही 13 प्रतिशत महंगाई भत्ते डीए से वंचित है तथा वर्ष 2016 के वेतन आयोग के एरियर का भुगतान भी लंबे समय से लंबित है। ऐसे में वेतन में कटौती करना कर्मचारियों पर दोहरी मार है, जो बढ़ती महंगाई के बीच उनके जीवन स्तर को प्रभावित करेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पिछले चार बजटों में कर्मचारियों को केवल आश्वासन देती रही है, जबकि वास्तविक राहत देने में पूरी तरह विफल रही है। लगभग 2 लाख कर्मचारियों को प्रति माह 10 हजार रुपए से अधिक का नुकसान उठाना पड़ रहा है और लाखों रुपये का एरियर अब तक जारी नहीं किया गया है। यह कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

डॉ. पुंडीर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पहली बार ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है, जहां सरकार अपने संचालन के लिए कर्मचारियों के वेतन पर निर्भर होती दिखाई दे रही है। यह न केवल प्रशासनिक कमजोरी को दर्शाता है, बल्कि वित्तीय कुप्रबंधन का भी स्पष्ट संकेत है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी कर्मचारी कभी अकेला नहीं होता, बल्कि उसके वेतन पर 10 से अधिक लोगों का भरण-पोषण निर्भर करता है। ऐसे में इस प्रकार के फैसले केवल कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि प्रदेश के 70 हजार से अधिक परिवारों को सीधे तौर पर प्रभावित करेंगे, जो अत्यंत गंभीर सामाजिक और आर्थिक चिंता का विषय है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों की अनदेखी करती रही, तो प्रदेश का कर्मचारी वर्ग लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होगा। उन्होंने प्रदेश के सभी शिक्षक संगठनों, कर्मचारी संघों एवं बुद्धिजीवी वर्ग से अपील की कि वे इस मुद्दे पर एकजुट होकर कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए सशक्त आवाज उठाएं।

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