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नारनौल | अपराधियों पर कार्रवाई करने गई CIA टीम से दुर्व्यवहार: आखिर दोषियों पर कब चलेगा कानून का डंडा?
नारनौल | पिछले सप्ताह सामने आया एक मामला अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जानकारी के अनुसार क्षेत्र में फैल रहे अवैध सट्टा कारोबार और युवाओं को बर्बादी की ओर धकेल रहे नेटवर्क पर कार्रवाई करने के लिए सीआईए टीम एक सूचना के आधार पर रेड करने पहुंची थी। पुलिस का उद्देश्य अपराध पर अंकुश लगाना और समाज में कानून व्यवस्था बनाए रखना था, लेकिन कार्रवाई के दौरान जो घटनाक्रम सामने आया, उसने कानून के सम्मान और पुलिस की सुरक्षा दोनों पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार सीआईए टीम को सूचना मिली थी कि एक मकान में सट्टा बुक्की का अवैध कारोबार संचालित किया जा रहा है। सूचना के आधार पर टीम मौके पर पहुंची, लेकिन वहां पुलिस को ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला जिससे सट्टा संचालन की पुष्टि हो सके। बताया जा रहा है कि इसके बाद मौके पर विवाद की स्थिति बन गई और पुलिस टीम के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। चर्चा तो यहां तक है कि ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट भी हुई।

मामला बढ़ने पर सिटी थाना प्रभारी को अतिरिक्त पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचना पड़ा। हालांकि बाद में स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया, लेकिन यह सवाल आज भी बना हुआ है कि यदि पुलिस टीम के साथ दुर्व्यवहार या मारपीट हुई थी तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
अपराध के खिलाफ लड़ रही पुलिस को मिला विरोध
यह समझना जरूरी है कि सीआईए और पुलिस की टीमें किसी निजी कारण से नहीं बल्कि कानून लागू करने और अपराध पर रोक लगाने के लिए कार्रवाई करती हैं। यदि किसी सूचना के आधार पर पुलिस जांच करने पहुंचती है तो सहयोग करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। सूचना सही निकले या गलत, इसका निर्णय जांच के बाद होता है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में कानून हाथ में लेना या पुलिस टीम के साथ अभद्रता करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

कानून से ऊपर कोई नहीं
समाज में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस दिन-रात काम करती है। अपराधियों, नशा तस्करों, सट्टा संचालकों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यदि किसी पुलिस टीम के साथ मारपीट या अभद्रता की घटना होती है तो यह केवल पुलिस का नहीं बल्कि कानून और व्यवस्था का अपमान माना जाना चाहिए।
इस पूरे मामले में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए। यदि वास्तव में पुलिस टीम के साथ दुर्व्यवहार हुआ है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ बदसलूकी करने का साहस न कर सके। कानून का सम्मान और पुलिस का मनोबल दोनों किसी भी सभ्य समाज की बुनियाद होते ।
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