Ambala News | ₹45 लाख टैक्स बकाया होने पर वन विभाग का दफ्तर सील : कर्मचारियों को बाहर निकालकर निगम ने की कार्रवाई | नोटिस का जवाब नहीं मिलने का दावा

नगर निगम अंबाला ने टैक्स बकायादारों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। इस बार निगम की कार्रवाई एक सरकारी विभाग पर हुई है। नगर निगम की टीम ने वन विभाग के कार्यालय को सील कर दिया। निगम अधिकारियों के अनुसार वन विभाग पर करीब 45 लाख रुपये का टैक्स बकाया था और नोटिस दिए जाने के बावजूद बकाया राशि जमा नहीं कराई गई।
नगर निगम की टीम कार्रवाई के लिए वन विभाग के कार्यालय पहुंची। कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों को बाहर निकाला गया और इसके बाद दफ्तर को सील कर दिया गया। सरकारी विभाग के कार्यालय पर हुई इस कार्रवाई के बाद नगर निगम की टैक्स वसूली मुहिम चर्चा में आ गई है।

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि वन विभाग की ओर से लंबे समय से टैक्स जमा नहीं कराया गया था। निगम के रिकॉर्ड के अनुसार विभाग पर बकाया राशि बढ़कर करीब 45 लाख रुपये हो चुकी थी। बकाया टैक्स की वसूली के लिए वन विभाग को पहले नोटिस भी जारी किए गए थे।
निगम का कहना है कि नोटिस जारी करने के बावजूद निर्धारित समय में वन विभाग की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला और न ही बकाया टैक्स का भुगतान किया गया। इसके बाद निगम की ओर से सीलिंग की कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया।
नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक टैक्स वसूली को लेकर सरकारी और निजी बकायादारों के बीच कोई भेद नहीं किया जाएगा। जिन संपत्तियों या संस्थानों पर निगम का टैक्स बकाया है, उनके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग के कार्यालय पर हुई कार्रवाई को भी इसी टैक्स वसूली अभियान का हिस्सा बताया गया है।

निगम का कहना है कि टैक्स से मिलने वाली राशि शहर में नागरिक सुविधाओं और विकास कार्यों पर खर्च होती है। ऐसे में लंबे समय तक टैक्स जमा नहीं करने वाले बकायादारों से राशि की वसूली के लिए नोटिस देने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
वन विभाग के कार्यालय को सील किए जाने के बाद अब बकाया टैक्स के भुगतान और कार्यालय को दोबारा खोलने की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। फिलहाल वन विभाग की ओर से इस कार्रवाई या 45 लाख रुपये की बकाया राशि को लेकर कोई पक्ष उपलब्ध नहीं कराया गया है।
नगर निगम ने संकेत दिया है कि टैक्स बकायादारों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। ऐसे में लंबे समय से निगम का टैक्स जमा नहीं कराने वाले अन्य संस्थानों और संपत्तियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
Editor: शिवानी राजपूत



