महेंद्रगढ़ | हकेवि में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन : डिकॉलोनियल अध्ययन पर गहन मंथन | 10 ऑफलाइन व 35 ऑनलाइन सत्र हुए आयोजित

रिपोर्टर: सुशील शर्मा
| महेंद्रगढ़
हकेवि महेंद्रगढ़ में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन
हकेवि महेंद्रगढ़ में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन

महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के अंग्रेज़ी एवं विदेशी भाषा विभाग द्वारा स्पेन के यूनिवर्सिटी ऑफ अलकाला के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुक्रवार को समापन हो गया। ‘डिकॉलोनाइजिंग इंग्लिश लिटरेरी स्टडीज़- इंडिजिनस एपिस्टेमोलॉजीज़, काउंटर-नैरेटिव्स एंड नॉलेज फ्यूचर्स’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वानों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लेकर समकालीन अकादमिक विमर्शों पर गहन चर्चा की।

समापन सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. राजकुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में सम्मेलन की संयोजक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. तनु गुप्ता ने स्वागत भाषण देते हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, संकाय सदस्यों और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सम्मेलन के दौरान हुए शैक्षणिक संवाद को अत्यंत सार्थक और महत्वपूर्ण बताया।

इसके बाद सम्मेलन की संयोजक डॉ. श्वेता नंदा ने विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि सम्मेलन के अंतर्गत 10 ऑफलाइन और 35 ऑनलाइन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विभिन्न विषयों पर शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. स्नेहसता द्वारा किया गया। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार द्वारा मुख्य अतिथि को सम्मानित किया गया।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो. राज कुमार ने साहित्य और सांस्कृतिक अध्ययन में डिकॉलोनियल विमर्श की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अंग्रेज़ी साहित्य अध्ययन के इतिहास को समझे बिना डिकॉलोनाइजेशन की प्रक्रिया को पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। उन्होंने बताया कि भारत में अंग्रेज़ी शिक्षा औपनिवेशिक प्रभाव का परिणाम रही है और प्रारंभिक भारतीय साहित्य पर इसका स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है।

उन्होंने अलोक मुखर्जी की पुस्तक ‘द गिफ्ट ऑफ इंग्लिश’ का उल्लेख करते हुए यह प्रश्न उठाया कि अंग्रेज़ी शिक्षा का वास्तविक लाभ किन वर्गों तक पहुंचा। साथ ही उन्होंने अकादमिक जगत में स्वदेशी ज्ञान, स्थानीय कथाओं और बौद्धिक परंपराओं को प्रमुखता देने की आवश्यकता पर बल दिया।

हकेवि के कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार ने अपने संबोधन में आयोजन समिति, संकाय सदस्यों और प्रतिभागियों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की और उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए तथा उत्कृष्ट शोध प्रस्तुतियों के लिए ‘बेस्ट पेपर अवार्ड’ भी प्रदान किए गए। इन पुरस्कारों की घोषणा डॉ. सुदीप कुमार द्वारा की गई।

समापन सत्र के अंत में डॉ. रीनू ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजन समिति का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस प्रकार सम्मेलन का समापन शैक्षणिक संवाद, शोध प्रस्तुतियों और विचारों के आदान-प्रदान के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

Edit By: शिवानी राजपूत
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