ज़िला
नारनौल | शराब माफिया पर सरकार का शिकंजा : सस्ती देसी शराब बेचने का भंडाफोड़ | गुप्त छापेमारी के बाद दो ठेके सील
नारनौल | निर्धारित दर से कम कीमत पर देसी शराब बेचने के मामले ने अब बड़ा रूप ले लिया है। सरकार ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़ा एक्शन किया है। गुप्त जांच टीम की छापेमारी के बाद शहर के दो शराब ठेकों को सील कर दिया गया है। कार्रवाई के बाद आबकारी विभाग में हड़कंप मचा हुआ है, जबकि विभागीय अधिकारी पूरे मामले पर खुलकर कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार पिछले पखवाड़े मीडिया में प्रमुखता से यह खबर प्रकाशित हुई थी कि नारनौल के कई ठेकों पर सरकार द्वारा तय रेट से कम कीमत पर देसी शराब बेची जा रही है। इतना ही नहीं, कुछ ठेके निर्धारित समय से पहले ही खोले जाने की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही थीं। खबर सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर हलचल तो हुई, लेकिन कार्रवाई केवल आश्वासनों तक सीमित रही।

अवैध शराब बिक्री पर शिकंजा, नारनौल में दो ठेकों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
उस समय संबंधित आबकारी निरीक्षक सुरेंद्र सिंह ने मीडिया से कहा था कि ठेकेदारों को रेट सही रखने के निर्देश दिए जाएंगे। लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी रही। इसके बाद विभाग के मुख्यालय ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए दूसरे जिले की एक गुप्त टीम को नारनौल भेजा।
सूत्रों के अनुसार गुप्त टीम ने कई ठेकों पर अचानक छापेमारी की। जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद दो ठेकों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया। हालांकि विभाग की ओर से आधिकारिक रूप से कार्रवाई का पूरा कारण स्पष्ट नहीं किया जा रहा है। यही वजह है कि पूरे मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

सस्ती देसी शराब मामले में सील हुआ ठेका, जांच के बाद बढ़ी सख्ती
शहर में सबसे ज्यादा चर्चा उस सूचना को लेकर है जिसमें बताया जा रहा है कि एक ठेके पर बिना होलोग्राम मार्क वाली शराब भी मिली थी। यदि यह बात सही साबित होती है तो मामला केवल रेट उल्लंघन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अवैध शराब बिक्री और बड़े स्तर की मिलीभगत तक पहुंच सकता है। हालांकि विभाग के अधिकारी इस विषय पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
विभागीय अधिकारियों की चुप्पी ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि यदि निर्धारित रेट से कम कीमत पर शराब बेची जा रही थी तो स्थानीय निरीक्षण व्यवस्था क्या कर रही थी। आखिर किसके संरक्षण में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मीडिया में मामला उजागर नहीं होता तो शायद यह खेल यूं ही चलता रहता। अब लोगों की मांग है कि केवल ठेके सील करने तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए।
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