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नारनौल। एम्स और लॉजिस्टिक हब में एक ही जमीन नीति : फिर एक पर सन्नाटा और दूसरे पर सियासत क्यों | दस्तावेजों के साथ डॉ. अभय सिंह यादव का बड़ा पलटवार
नारनौल। पिछले छह महीने से हरियाणा के नारनौल स्थित मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब (एमएमएलएच) के लिए किसानों की जमीन खरीद को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी के बीच पूर्व मंत्री डॉ. अभय सिंह यादव पहली बार विस्तृत दस्तावेजों के साथ मीडिया के सामने आए। उन्होंने पत्रकार वार्ता में दावा किया कि लॉजिस्टिक हब की जमीन खरीद पूरी तरह 2013 के भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता अधिनियम तथा हरियाणा सरकार की नीति के अनुरूप हुई। उनका आरोप था कि पिछले छह महीनों से सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों के माध्यम से तथ्यों को तोड़-मरोड़कर जनता के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है और सरकार की महत्वाकांक्षी विकास परियोजनाओं को राजनीतिक विवाद में घसीटने का प्रयास किया जा रहा है।
करीब डेढ़ घंटे चली प्रेस वार्ता में डॉ. अभय सिंह यादव ने एचएसआईडीसी की जमीन खरीद प्रक्रिया, मुआवजा निर्धारण, न्यायालयों में चले मामलों और उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी के पास भ्रष्टाचार का कोई ठोस प्रमाण है तो वह जांच एजेंसियों या न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे। केवल राजनीतिक आरोपों से विकास परियोजनाओं को बदनाम करना उचित नहीं है।

बिना किसी का नाम लिए उन्होंने केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग वर्षों पुराने मामलों को उठाकर जनता को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जमीन खरीद में कोई अनियमितता थी तो आठ वर्षों तक इस मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई और अब अचानक इसे राजनीतिक मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है।
2013 के कानून का दिया हवाला
डॉ. अभय सिंह यादव ने कहा कि 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून का मूल उद्देश्य किसानों को बाजार मूल्य से बेहतर मुआवजा देना है। उन्होंने कहा कि इसी नीति के तहत वर्ष 2017 में लॉजिस्टिक हब के लिए संबंधित क्षेत्र का कलेक्टर रेट लगभग 13 लाख रुपये प्रति एकड़ था, जबकि किसानों को लगभग 30 लाख रुपये प्रति एकड़ का भुगतान किया गया। उनके अनुसार किसानों को कलेक्टर रेट से कहीं अधिक मुआवजा दिया गया।
उन्होंने कहा कि रेवाड़ी में निर्माणाधीन एम्स परियोजना में भी सरकार ने लगभग इसी नीति का पालन किया। वहां कलेक्टर रेट करीब 24 लाख रुपये प्रति एकड़ था और किसानों को लगभग 40 लाख रुपये प्रति एकड़ का भुगतान किया गया। उनका तर्क था कि जब दोनों परियोजनाओं में जमीन खरीद का मॉडल समान है तो केवल नारनौल के लॉजिस्टिक हब को विवादों में घसीटना राजनीतिक मंशा को दर्शाता है।

100 गज के प्लॉट का गणित भी रखा
डॉ. अभय सिंह यादव ने एम्स परियोजना का उदाहरण देते हुए दावा किया कि अधिग्रहित जमीन के मुआवजे का औसत निकालने पर किसानों की जमीन का मूल्य लगभग 800 रुपये प्रति वर्ग गज बैठता है। वहीं जिन किसानों को 100-100 गज के व्यावसायिक प्लॉट दिए गए, उनसे प्रत्येक प्लॉट के लिए लगभग 5 लाख रुपये लिए गए, जो लगभग 5,000 रुपये प्रति वर्ग गज की दर बैठती है।
उन्होंने कहा कि यदि किसान की जमीन का मूल्य लगभग 800 रुपये प्रति गज माना गया और बाद में उसी किसान को व्यावसायिक प्लॉट लगभग 5,000 रुपये प्रति गज की दर से मिला, तो केवल यह कहना कि प्लॉट मुफ्त दिए गए, पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। उनके अनुसार इस पहलू को सार्वजनिक चर्चा में जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।
लॉजिस्टिक हब पर राजनीति, विकास पर नहीं
पूर्व मंत्री ने कहा कि उनकी राजनीति हमेशा विकास आधारित रही है। उन्होंने दावा किया कि लॉजिस्टिक हब, औद्योगिक निवेश, रोजगार, मेडिकल कॉलेज और आधारभूत ढांचे जैसी परियोजनाएं दक्षिण हरियाणा की आर्थिक तस्वीर बदल सकती हैं। उनका आरोप था कि कुछ राजनीतिक लोग बड़े प्रोजेक्टों का श्रेय लेने या उन्हें विवादों में डालने की राजनीति करते हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी औद्योगिक परियोजना पर लगातार विवाद खड़ा करने से निवेशकों का विश्वास प्रभावित होता है और इसका सीधा असर क्षेत्र के युवाओं के रोजगार और औद्योगिक विकास पर पड़ता है।
विरोधियों को चुनौती
डॉ. अभय सिंह यादव ने कहा कि वह अपनी 28 वर्षों की सरकारी सेवा का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई उन पर एक रुपये के भ्रष्टाचार का भी प्रमाण दे दे तो वह राजनीति से संन्यास लेने को तैयार हैं।
अधूरी परियोजनाओं पर भी उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि जो लोग लॉजिस्टिक हब पर सवाल उठा रहे हैं, वे पहले अपने कार्यकाल में घोषित विकास कार्यों का हिसाब दें। उन्होंने दावा किया कि कई सड़क परियोजनाएं वर्षों बाद भी पूरी नहीं हो सकीं, जबकि लगभग 750 करोड़ रुपये की लागत वाले मेडिकल कॉलेज का निर्माण भी अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रहा।
जनता तथ्य देखे, अफवाह नहीं
पत्रकार वार्ता के अंत में डॉ. अभय सिंह यादव ने कहा कि क्षेत्र की जनता राजनीतिक प्रचार और दस्तावेजी तथ्यों में अंतर करना जानती है। उन्होंने दोहराया कि लॉजिस्टिक हब की जमीन खरीद पूरी तरह कानून और सरकारी नीति के अनुरूप हुई है तथा इससे जुड़े सभी तथ्य सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट सूचनाओं के बजाय आधिकारिक दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर राय बनाएं।
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