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रेवाड़ी | जीत के बाद बदले सुर : बीजेपी के नाम पर मांगे वोट | अब सिर्फ राव परिवार का गुणगान | विनीता पिपल की पोस्ट ने खोली अंदरूनी राजनीति
रेवाड़ी | नगर परिषद चुनाव खत्म होते ही अब जीत के श्रेय को लेकर राजनीति खुलकर सामने आने लगी है। नगर परिषद अध्यक्ष चुनी गई विनीता पिपल के सोशल मीडिया अकाउंट पर डाले गए एक पोस्टर ने भाजपा और राव समर्थकों के बीच अंदरूनी खींचतान की चर्चाओं को तेज कर दिया है। चुनाव के दौरान भाजपा संगठन, भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांगने वाले नेता अब जीत के बाद पोस्टरों से भाजपा को लगभग गायब कर चुके हैं, जिसको लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
चुनावी जीत के बाद दक्षिण हरियाणा की राजनीति में राव इंद्रजीत सिंह फिर चर्चा के केंद्र में।
वायरल हो रहे पोस्टर में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की तस्वीर और राव समर्थक चेहरों को प्रमुखता से जगह दी गई है, जबकि चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा का झंडा, भाजपा सरकार की योजनाएं और संगठन की ताकत को लगातार जनता के सामने रखा गया था। मंचों से भाजपा के समर्थन में नारे लगाए गए, भाजपा की नीतियों को विकास का आधार बताया गया और मतदाताओं को यह संदेश दिया गया कि यह चुनाव भाजपा की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है। लेकिन जैसे ही चुनाव परिणाम सामने आए, सोशल मीडिया पर जारी किए गए पोस्टरों से भाजपा का नाम और चेहरा पीछे होता दिखाई देने लगा।
22 हजार से अधिक वोटों से जीत के बाद समर्थकों ने विनीता पिपल को दी बधाई।
चुनाव प्रचार के दौरान स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव भी लगातार सभाओं में भाजपा के पक्ष में प्रचार करती नजर आई थीं। भाजपा कार्यकर्ता घर-घर जाकर पार्टी के नाम पर वोट मांगते रहे। कई जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री के नाम पर भी समर्थन जुटाया गया। लेकिन अब जीत के बाद जिस तरह सोशल मीडिया पर सिर्फ राव परिवार केंद्र में दिखाई दे रहा है, उससे भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भी नाराजगी की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
नगर परिषद अध्यक्ष बनने के बाद विनीता पिपल ने जनता का जताया आभार।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि रेवाड़ी और धारूहेड़ा क्षेत्र में लंबे समय से भाजपा और राव राजनीति एक-दूसरे के सहारे आगे बढ़ती रही है। चुनाव के समय संगठन और कार्यकर्ताओं की ताकत का उपयोग किया जाता है, लेकिन जीत के बाद श्रेय लेने की राजनीति अलग दिशा पकड़ लेती है। यही कारण है कि इस बार सोशल मीडिया पर डाले गए पोस्टरों को लेकर भाजपा समर्थकों के बीच भी सवाल उठने लगे हैं।
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स तंज कसते हुए लिख रहे हैं कि चुनाव तक भाजपा याद रही, लेकिन कुर्सी मिलते ही तस्वीर बदल गई। कुछ लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि अगर जीत केवल व्यक्तिगत प्रभाव के आधार पर मिली थी तो फिर चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा और प्रधानमंत्री के नाम का इस्तेमाल क्यों किया गया। वहीं कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि बूथ स्तर पर मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है और पूरी जीत को एक परिवार के खाते में डालने की कोशिश हो रही है।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि आने वाले समय में यह अंदरूनी असंतोष भाजपा संगठन और स्थानीय राजनीति में असर डाल सकता है। कई लोग इसे भाजपा के अंदर शक्ति संतुलन की लड़ाई के रूप में भी देख रहे हैं। रेवाड़ी की राजनीति में पहले भी कई बार ऐसा देखा गया है कि चुनाव के समय पार्टी और व्यक्तिगत प्रभाव साथ-साथ चलते हैं, लेकिन परिणाम आने के बाद श्रेय लेने की होड़ अलग विवाद खड़ा कर देती है।
वहीं दूसरी ओर राव समर्थकों का तर्क है कि क्षेत्र में राव इंद्रजीत सिंह का व्यक्तिगत प्रभाव बेहद मजबूत है और जनता ने उसी भरोसे के आधार पर मतदान किया। हालांकि भाजपा समर्थक इस तर्क को पूरी तरह स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रहे। उनका कहना है कि यदि भाजपा संगठन, कार्यकर्ता और सरकार की ताकत साथ नहीं होती तो चुनावी समीकरण इतने आसान नहीं होते।
अब रेवाड़ी की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है कि यह जीत आखिर किसकी मानी जाए — भाजपा संगठन की, कार्यकर्ताओं की मेहनत की, जनता के समर्थन की या फिर सिर्फ एक परिवार के प्रभाव की। फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्टर ने नगर परिषद चुनाव खत्म होने के बाद भी राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।
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