बंगाल चुनाव में शत्रुघ्न सिन्हा की नीली बत्ती वाली गाड़ी पर विवाद : भाजपा ने उठाए सवाल

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बंगाल विधानसभा चुनाव : चुनावी प्रचार में शत्रुघ्न सिन्हा के नीली बत्ती लगी गाड़ी के इस्तेमाल पर घमासान
बंगाल विधानसभा चुनाव : चुनावी प्रचार में शत्रुघ्न सिन्हा के नीली बत्ती लगी गाड़ी के इस्तेमाल पर घमासान

कोलकाता, 23 मार्च। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के प्रचार के बीच आसनसोल से तृणमूल कांग्रेस सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की नीली बत्ती लगी गाड़ी को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए चुनाव आयोग में शिकायत करने की बात कही है।

विवाद तब शुरू हुआ जब शत्रुघ्न सिन्हा रविवार को पश्चिम बर्दवान जिले के जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार हरेराम सिंह के समर्थन में एक चुनावी कार्यक्रम में पहुंचे। वह जिस गाड़ी से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, उस पर नीली बत्ती लगी थी और वाहन के आगे “सांसद, आसनसोल” का बोर्ड तथा अशोक स्तंभ का प्रतीक चिह्न लगा हुआ था।

इस घटना के बाद सवाल उठने लगे हैं कि आचार संहिता लागू होने के बाद क्या चुनाव प्रचार के दौरान किसी जनप्रतिनिधि द्वारा नीली बत्ती लगी गाड़ी का उपयोग किया जा सकता है। भाजपा ने इसे नियमों का उल्लंघन बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।

जामुड़िया से भाजपा उम्मीदवार बिजन मुखर्जी ने शत्रुघ्न सिन्हा पर आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले को चुनाव आयोग के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर न्यायालय तक भी ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आचार संहिता लागू होने के बाद किसी भी व्यक्ति को नीली बत्ती या अशोक स्तंभ लगे वाहन का उपयोग नहीं करना चाहिए।

हालांकि, शत्रुघ्न सिन्हा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नीली बत्ती विशेष रूप से इस कार्यक्रम के लिए नहीं लगाई गई थी और न ही इसे उन्होंने खुद लगवाया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि बत्ती चालू नहीं थी और वह हमेशा कानून का पालन करते हैं।

सूत्रों के अनुसार, विवाद बढ़ने के बाद कार्यक्रम समाप्ति पर जब वह अपनी गाड़ी में लौटे तो वाहन पर नीली बत्ती दिखाई नहीं दी। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने सहायक को इसे हटाने के निर्देश दिए थे, हालांकि वाहन पर “सांसद” का बोर्ड और अशोक स्तंभ का चिन्ह बना रहा।

भाजपा का आरोप है कि नीली बत्ती का उपयोग आम जनता पर प्रभाव डालने के उद्देश्य से किया गया। पार्टी का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि ही नियमों की अनदेखी करेंगे तो इससे गलत संदेश जाएगा।

 

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