ज़िला
नारनौल | करोड़ों का सफाई ठेका फिर भी नारनौल गंदगी में डूबा : आखिर जिम्मेदार कौन
नारनौल | शहर में स्वच्छता को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावे अब पूरी तरह सवालों के घेरे में दिखाई दे रहे हैं। शहर की गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य बाजारों तक जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। आखिर करोड़ों रुपये का सफाई ठेका हर साल किस लिए छोड़ा जा रहा है, जब शहर की हालत दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है?

करोड़ों के सफाई ठेके के बावजूद नारनौल की सड़कों पर पसरी गंदगी।
शहर के कई इलाकों में नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। सड़कों के किनारे पड़े कूड़े के ढेरों से उठ रही बदबू आम लोगों का जीना मुश्किल कर रही है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या प्रशासन और नगर परिषद के अधिकारियों को यह गंदगी दिखाई नहीं देती, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?
सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि जब सरकार स्वच्छता अभियान के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तब नारनौल शहर को गंदगी से छुटकारा क्यों नहीं मिल पा रहा? क्या सफाई व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?
जनता में नगर परिषद के जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ भारी रोष देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि अधिकारी केवल बैठकों और दावों तक सीमित हैं, जबकि जमीन पर हालात बेहद खराब हैं। शहर के मुख्य मार्गों से रोज गुजरने वाले नेताओं पर भी जनता ने सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि भाजपा के नेता विकास और स्वच्छता की बातें तो खूब करते हैं, लेकिन क्या उन्हें सड़क किनारे लगे कूड़े के पहाड़ दिखाई नहीं देते?
मेहता चौक क्षेत्र के दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने गंदगी की गंभीर समस्या पर चिंता जताई है। मेहता चौक निवासी सुनील कुमार, विजय कुमार, डॉ. महेंद्र सैनी, प्रकाश चंद सहित अनेक दुकानदारों ने कहा कि लंबे समय से क्षेत्र में कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। दुकानदारों का कहना है कि गंदगी और बदबू के कारण ग्राहकों का आना-जाना भी प्रभावित हो रहा है तथा बीमारी फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर नगर परिषद की सफाई टीमें कहां हैं? क्या अधिकारियों ने कभी शहर की वास्तविक स्थिति देखने की कोशिश की है? जनता का कहना है कि यदि जल्द सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे सकता है।
अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर नारनौल शहर को इस गंदगी से मुक्ति कब मिलेगी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी।
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