नांगल चौधरी | 70 साल से ज्यादा पुरानी सरकारी स्कूल बदहाली का शिकार : बच्चों के भविष्य के लिए ग्रामीणों ने बुलंद की आवाज | नए भवन, साइंस संकाय और बस स्टैंड की ओर मुख्य गेट बनाने की मांग तेज
नांगल चौधरी के भूँगारका गांव में सरकारी स्कूल की जर्जर स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने आवाज उठाई है।

नांगल चौधरी | क्षेत्र के गांव भूँगारका स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की जर्जर हालत को लेकर शुक्रवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण स्कूल परिसर में एकत्रित हुए। ग्रामीणों ने पूरे विद्यालय का निरीक्षण कर बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और भविष्य से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए। ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय रहते विद्यालय की स्थिति में सुधार नहीं किया गया तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय के आठ कमरे कंडम घोषित हैं। इन कमरों के आसपास रस्सियां और तार बांधकर उन्हें बंद किया गया है ताकि बच्चे वहां न जा सकें। उनका कहना है कि जिस विद्यालय में सैकड़ों बच्चे प्रतिदिन शिक्षा ग्रहण करने आते हैं, वहां जर्जर भवन बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों ने बताया कि यह विद्यालय नांगल चौधरी क्षेत्र के सबसे पुराने शिक्षण संस्थानों में से एक है। वर्ष 1950 में इसकी नींव रखी गई थी। 1952 में यहां पहली बार कक्षाएं शुरू हुईं, 1959 में दसवीं तक की पढ़ाई शुरू हुई और 1997 में विद्यालय को बारहवीं तक अपग्रेड किया गया। इतने लंबे इतिहास के बावजूद विद्यालय भवन का कभी समुचित पुनर्निर्माण नहीं हुआ, जिसके कारण आज इसकी स्थिति बेहद खस्ताहाल हो चुकी है। 
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में विद्यालय में केवल आर्ट्स संकाय की पढ़ाई होती है। साइंस संकाय नहीं होने के कारण विद्यार्थियों, विशेषकर बेटियों को आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे गांवों और कस्बों का रुख करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि विद्यालय में जल्द से जल्द विज्ञान संकाय शुरू किया जाए ताकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को अपने गांव में ही बेहतर शिक्षा उपलब्ध हो सके।
ग्रामीणों ने स्कूल तक पहुंचने वाले रास्ते की समस्या भी उठाई। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में विद्यालय जाने वाले मार्ग पर पानी भर जाता है, जिससे विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि विद्यालय का मुख्य प्रवेश द्वार गांव के बस स्टैंड की ओर बनाया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।

विद्यालय के प्राचार्य ने ग्रामीणों को जानकारी दी कि विद्यालय भवन की मरम्मत के लिए करीब 97 लाख रुपये की राशि पहले ही स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन अभी तक कार्य का टेंडर जारी नहीं हुआ है।
हालांकि ग्रामीणों ने इस प्रस्ताव पर असहमति जताते हुए कहा कि विद्यालय की मौजूदा हालत को देखते हुए केवल मरम्मत से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका कहना है कि 70 वर्ष से अधिक पुराने भवन को नए सिरे से आधुनिक सुविधाओं के साथ बनाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि नया विद्यालय भवन बनाया जाता है, विज्ञान संकाय शुरू किया जाता है और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं तो विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या भी बढ़ेगी और आसपास के गांवों के बच्चों को भी इसका लाभ मिलेगा।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे अपनी आवाज को और बुलंद करेंगे तथा मुख्यमंत्री से मिलकर पूरे मामले से अवगत कराएंगे। उनका कहना है कि सरकार प्रदेशभर में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने का कार्य कर रही है, ऐसे में क्षेत्र के सबसे पुराने विद्यालय की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सरकार और शिक्षा विभाग से बच्चों के हित में जल्द नया विद्यालय भवन स्वीकृत करने, साइंस संकाय शुरू करने तथा सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।



