ज़िला
नांगल चौधरी। शहर से गांव तक फैला भू-माफियाओं का जाल : कृषि भूमि पर बस रहीं अवैध कॉलोनियां | प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल
नांगल चौधरी। क्षेत्र में भू-माफियाओं का नेटवर्क अब शहरों से निकलकर ग्रामीण अंचलों तक पहुंच चुका है। सरकार द्वारा शहरी क्षेत्रों में बिना अप्रूव्ड कॉलोनी के रजिस्ट्रियों पर सख्ती किए जाने के बाद अब अवैध कॉलोनाइजरों ने गांवों की कृषि भूमि को अपनी काली कमाई का नया अड्डा बना लिया है।
क्षेत्र में पहले गौशाला रोड और अब सब डिवीजन कार्यालय के नजदीक स्थित गांव शहबाजपुर में करीब एक दर्जन एकड़ कृषि भूमि को खुर्द-बुर्द कर अवैध कॉलोनी बसाने का खेल खुलेआम चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिला प्रशासन, जिला नगर योजनाकार विभाग और संबंधित एजेंसियां सब कुछ जानते हुए भी मौन बनी हुई हैं।
जानकारी के अनुसार जिस भूमि पर प्लॉट काटे जा रहे हैं वह पूरी तरह कृषि योग्य जमीन है। नियमानुसार कृषि भूमि का उपयोग बिना वैधानिक अनुमति के आवासीय कॉलोनी के रूप में नहीं किया जा सकता, लेकिन भू-माफिया नियमों को ठेंगा दिखाकर खेतों में सड़कों की लाइनें खींच रहे हैं और भोले-भाले लोगों को सस्ते प्लॉट व सुनहरे भविष्य के सपने दिखाकर जाल में फंसा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिना स्वीकृत कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने वाले लोगों को भविष्य में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी कॉलोनियों में न तो कानूनी रूप से बिजली, पानी, सीवरेज और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित होती हैं और न ही भविष्य में संपत्ति संबंधी विवादों से सुरक्षा मिलती है। कई मामलों में लोगों की जीवनभर की जमा पूंजी तक डूब जाती है।
सबसे गंभीर बात यह है कि जब इस विषय पर नगरपालिका नांगल चौधरी से सवाल किया गया तो जवाब मिला कि यह क्षेत्र उनके कार्यक्षेत्र से बाहर है। सवाल यह उठता है कि यदि नगरपालिका जिम्मेदारी से हाथ खड़े कर दे, जिला नगर योजनाकार विभाग कार्रवाई न करे और प्रशासन मौन रहे तो आखिर आम जनता किसके भरोसे रहे?
क्षेत्र के सामाजिक लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस अवैध प्लॉटिंग पर रोक नहीं लगी तो आने वाले समय में नांगल क्षेत्र के आसपास की कृषि भूमि तेजी से समाप्त हो जाएगी और गांवों का स्वरूप भी अनियोजित बस्तियों में बदल जाएगा। इससे न केवल किसानों की उपजाऊ जमीन खत्म होगी बल्कि भविष्य में अवैध कब्जों, मूलभूत सुविधाओं और कानून व्यवस्था की समस्याएं भी बढ़ेंगी।
सरकार एक ओर नियोजित विकास और अवैध कॉलोनियों पर रोक की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीन पर भू-माफियाओं का खेल लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर ग्रामीण अंचलों की कृषि भूमि इसी तरह प्लॉटिंग माफियाओं के हवाले होती रहेगी।
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