महेंद्रगढ़ | 43°C की तपती गर्मी में कंबल : सर्दियों में बर्फ | महेंद्रगढ़ का संतलाल बना देशभर में चर्चा का विषय

रिपोर्टर: सुशील शर्मा
| महेंद्रगढ़

महेंद्रगढ़ | हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के छोटे से गांव डेरोली अहीर में रहने वाला एक साधारण ग्रामीण इन दिनों अपनी असाधारण शारीरिक स्थिति के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जब पूरा उत्तर भारत भीषण गर्मी से झुलस रहा है, तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और लोग घरों से निकलने से बच रहे हैं, तब गांव का संतलाल दो मोटे कंबल ओढ़कर अलाव के सामने बैठा नजर आता है। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान उसके शरीर पर पसीने की एक बूंद तक दिखाई नहीं देती।

वहीं सर्दियों में संतलाल का व्यवहार बिल्कुल उल्टा हो जाता है। ग्रामीणों के अनुसार कड़ाके की ठंड में उसे गर्मी महसूस होती है। वह बर्फ की सिल्ली पर लेट जाता है, सुबह तड़के तालाब में स्नान करता है और लंबे समय तक ठंडे पानी में रह लेता है। यह दृश्य वर्षों से गांव के लोगों के लिए सामान्य है, लेकिन बाहर से आने वाले लोगों और शोधकर्ताओं के लिए किसी रहस्य से कम नहीं।

ग्रामीण बताते हैं कि संतलाल बचपन से ही ऐसा है। उनका कहना है कि उसने आज तक किसी गंभीर बीमारी की शिकायत नहीं की। कई बार डॉक्टरों और विशेषज्ञों की टीमें उसकी जांच कर चुकी हैं, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार उसकी जीवनशैली में कोई बदलाव नहीं आया। संतलाल का कहना है कि उसे मौसम का एहसास आम लोगों से बिल्कुल अलग होता है—गर्मी में ठंड और ठंड में गर्मी महसूस होती है।

जिला प्रशासन भी कर चुका है सम्मानित

ग्रामीणों के अनुसार संतलाल की इस अनोखी शारीरिक स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन भी समय-समय पर उसे सम्मानित कर चुका है। वर्षों से वह स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में भी बना रहा है। गांव में लोग उसे उसके नाम से कम और “मौसम विभाग” के नाम से अधिक जानते हैं।

क्या कहता है विज्ञान?

मानव शरीर का तापमान नियंत्रित करने का कार्य मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) द्वारा किया जाता है। यही शरीर को ठंड या गर्मी का अनुभव कराने और पसीना आने जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। यदि किसी व्यक्ति को मौसम का अनुभव सामान्य लोगों से अलग हो रहा हो तो उसके पीछे कई संभावित चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं, जिनमें तंत्रिका तंत्र (Nervous System), हार्मोन, शरीर की तापमान नियंत्रित करने वाली प्रणाली या अन्य दुर्लभ स्थितियां शामिल हो सकती हैं।

हालांकि केवल बाहरी व्यवहार देखकर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। किसी भी व्यक्ति की ऐसी स्थिति का वास्तविक कारण केवल विस्तृत चिकित्सकीय जांच, विशेषज्ञों की राय और वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद ही निर्धारित किया जा सकता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक मौसम का असामान्य अनुभव हो रहा है तो उसकी न्यूरोलॉजिकल, एंडोक्राइन और मेटाबॉलिक जांच की जाती है। कई बार शरीर की तापमान महसूस करने की क्षमता में अंतर व्यक्तिगत जैविक कारणों से भी हो सकता है। ऐसे मामलों पर वैज्ञानिक अध्ययन किए जाते हैं और बिना चिकित्सकीय प्रमाण किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जाता।

गांव वालों के लिए कौतूहल नहीं, रोजमर्रा की सच्चाई

ग्रामीण सतबीर सहित कई लोगों का कहना है कि उन्होंने संतलाल को वर्षों से इसी तरह देखा है। उनका दावा है कि यह कोई प्रदर्शन या दिखावा नहीं, बल्कि उसकी सामान्य दिनचर्या है। यही वजह है कि गांव में आने वाले लोग उससे मिलने जरूर पहुंचते हैं।

बना हुआ है शोध का विषय

संतलाल का जीवन आज भी अनेक सवाल छोड़ता है। क्या यह शरीर की तापमान नियंत्रित करने वाली प्रणाली की कोई दुर्लभ अवस्था है? क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण छिपा है? या यह प्रकृति की कोई अनोखी देन है? इन सवालों के जवाब भविष्य में होने वाले विस्तृत वैज्ञानिक और चिकित्सकीय अध्ययन ही दे पाएंगे।

Edit By: न्यूज डेस्क
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