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नारनौल। पब्लिक हेल्थ में फर्जी टोकन खेल : एलओसी में गड़बड़ी के आरोप | चहेते ठेकेदारों को फायदा
नारनौल। पब्लिक हेल्थ विभाग डिविजन नंबर-1 एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते चर्चा में है। विभाग पर आरोप है कि यहां एलओसी (लेटर ऑफ क्रेडिट) की अधिकतम राशि का फायदा उठाकर चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर फर्जी टोकन और फर्जी बिलों का खेल खेला जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, विभाग में टोकन के आधार पर ही एलओसी की डिमांड भेजी जाती है और सरकार के नियमों के तहत जितनी एलओसी प्राप्त होती है, उसी के अनुपात में ठेकेदारों के बिलों का भुगतान किया जाता है। इसी प्रक्रिया का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए फर्जी टोकन तैयार कर डिमांड बढ़ाई जाती है, ताकि अधिक से अधिक भुगतान निकाला जा सके।
सूत्रों का दावा है कि कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को फायदा देने के कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसे टोकन बनाए जाते हैं, जिनका जमीनी कार्यों से कोई वास्तविक संबंध नहीं होता। इन टोकनों के आधार पर चहेते ठेकेदारों के कार्यों का भुगतान जारी कर दिया जाता है, जबकि अधिकांश ठेकेदार मन मसोस कर रह जाते हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जिन कार्यों के लिए टोकन जारी किए जाते हैं, उनमें से कई काम धरातल पर दिखाई ही नहीं देते। बावजूद इसके, कागजों में सभी कार्य पूर्ण दर्शाकर सरकारी खजाने से रकम निकाली जा रही है।
विभाग के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह खेल लंबे समय से जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। इस संबंध में एक लिखित शिकायत भी दी गई थी, जिसमें स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया गया कि 23 अगस्त 2025 की तारीख में 48939 से 49057 सीरियल तक बनाए गए बिल फर्जी टोकन दर्शाने के लिए तैयार किए गए थे।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उस समय तत्कालीन कार्यकारी अभियंता आदर्श कुमार सिंगला ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए उच्च अधिकारियों को पत्राचार भी किया था, लेकिन कुछ समय बाद उनके तबादले के चलते मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
इसके बाद 26 फरवरी 2026 को वर्तमान कार्यकारी अभियंता जितेंद्र कुमार ने शिकायतकर्ताओं के साथ बैठक कर जांच के बिंदु तय किए और संबंधित अधिकारियों से उक्त सीरियल के बिल प्रस्तुत करने को कहा था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग के उच्च अधिकारी इस पूरे खेल से अनजान हैं या फिर उनकी जानकारी में ही यह सब हो रहा है?
यदि इन आरोपों की निष्पक्ष और गहन जांच होती है तो बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है और कई जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है। फिलहाल, निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर मामले को लेकर क्या कदम उठाता है।
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