कनीना | जनस्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार की परतें खुलीं : उड़नदस्ता जांच के बाद एसडीओ-जेई पर कार्रवाई के आदेश
कनीना | जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के कनीना उपमंडल कार्यालय में अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की जांच रिपोर्ट के आधार पर अधीक्षक अभियंता नारनौल ने एसडीओ राजीव कुमार और जेई पवन कुमार के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। विभाग में लंबे समय से चल रही लापरवाही […]

कनीना | जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के कनीना उपमंडल कार्यालय में अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की जांच रिपोर्ट के आधार पर अधीक्षक अभियंता नारनौल ने एसडीओ राजीव कुमार और जेई पवन कुमार के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। विभाग में लंबे समय से चल रही लापरवाही और अनियमितताओं पर अब कार्रवाई शुरू होती दिखाई दे रही है।

कार्रवाई के आदेश
जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री उड़नदस्ता रेवाड़ी ने 11 दिसंबर 2025 को कनीना उपमंडल कार्यालय में औचक निरीक्षण किया था। जांच के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आईं। निरीक्षण के समय संबंधित अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं मिले। कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे खराब पाए गए, जबकि डीवीआर भी गायब मिला। वहीं बायोमेट्रिक हाजिरी मशीन को भी खराब रखा गया था।

जांच टीम को फर्जी हाजिरी, कर्मचारियों के ड्यूटी से गायब रहने और रिकॉर्ड में उपस्थिति दर्ज होने जैसे मामले भी मिले। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ कर्मचारी सरकारी ड्यूटी छोड़कर निजी वाहन चला रहे थे। वहीं पीडब्ल्यूडी कोड 5.22 के उल्लंघन में बिना डीएससी जांच के बिल सीधे हेड ऑफिस भेजे जा रहे थे।

जांच के दौरान झिगावन बूस्टिंग स्टेशन और कनीना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में भी कई कर्मचारी ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। सबसे चौंकाने वाला मामला कर्मचारी अनिल कुमार से जुड़ा बताया गया, जिसे भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में चयनित होने के बावजूद विभागीय रिकॉर्ड में अनुपस्थित दर्शाया जाता रहा।

मुख्यमंत्री उड़नदस्ता के डीएसपी द्वारा एडीजीपी पंचकूला को भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर करीब छह महीने बाद कार्रवाई शुरू हुई है। अधीक्षक अभियंता नारनौल ने कार्यकारी अभियंता को पत्र जारी कर पांच दिनों के भीतर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
इस कार्रवाई के बाद विभागीय कर्मचारियों में हड़कंप का माहौल है। मामले को सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत भ्रष्टाचार के खिलाफ अहम कार्रवाई माना जा रहा है।



