ज़िला
नारनौल | बागवानी विशेषज्ञों ने किया बागों का दौरा : किसानों को दिए तकनीकी सुझाव और फसल प्रबंधन की जानकारी
नारनौल | जिला बागवानी अधिकारी डॉ. प्रेम कुमार ने गांव मुंडिया खेड़ा, सुन्दरह, गुवानी और मांदी में किसानों के बागों का दौरा कर उन्हें बागवानी से जुड़ी तकनीकी जानकारी और जरूरी सुझाव दिए। इस दौरान क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल से फल विशेषज्ञ डॉ. मुकेश और क्षेत्रीय निदेशक डॉ. धर्मवीर यादव भी मौजूद रहे।
विशेषज्ञों ने किसानों को नींबू वर्गीय फलों के पौधों में निकलने वाले देसी फुटाव को तुरंत हटाने की सलाह दी। जिला बागवानी अधिकारी डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि यदि समय पर देसी फुटाव नहीं हटाया गया तो मूल पौधे की बजाय देसी पौधे की बढ़वार अधिक हो जाएगी, जिससे फल की गुणवत्ता प्रभावित होगी।

नारनौल में बागवानी विशेषज्ञों का दौरा, किसानों को दिए फलदार पौधों के रखरखाव के टिप्स
उन्होंने किसानों को मई-जून माह में नींबू वर्गीय पौधों पर 10 ग्राम यूरिया और 5 ग्राम जिंक (21 प्रतिशत) प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर 15 से 20 दिन के अंतराल पर छिड़काव करने की सलाह दी। इससे पौधों में पोषक तत्वों की पूर्ति होगी, फल गिरने की समस्या कम होगी तथा लू से भी पौधों का बचाव किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों ने बताया कि जिन किसानों ने बेर के बाग लगाए हुए हैं, वे इस माह कटाई-छंटाई का कार्य कर सकते हैं। वहीं खजूर के बागों में जमीन के पास निकलने वाले अतिरिक्त फुटाव हटाने और गर्मी के मौसम में हल्की सिंचाई जारी रखने की सलाह दी गई ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे।
किसानों को यह भी सुझाव दिया गया कि बागों को गर्मी और सर्दी से बचाने के लिए खेतों के चारों ओर वायूरोधक पौधे लगाए जाएं। इससे तेज हवाओं से फूल और फल गिरने की समस्या कम होगी तथा खेत का तापमान संतुलित रहेगा।
फल विशेषज्ञ डॉ. मुकेश ने नए फलदार पौधों को लू से बचाने के लिए उन्हें ढककर रखने और तनों के निचले हिस्से पर बोर्डो पेस्ट लगाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि 2 किलोग्राम नीला थोथा, 3 किलोग्राम बुझा चूना और 30 लीटर पानी मिलाकर बोर्डो पेस्ट तैयार किया जा सकता है।
उन्होंने बागों में खरपतवार नियंत्रण और नमी संरक्षण के लिए मल्चिंग तकनीक अपनाने पर भी जोर दिया। साथ ही नए बाग लगाने वाले किसानों को मिट्टी और पानी की जांच करवाने के बाद उचित दूरी पर गड्ढे खोदकर उनमें गोबर की खाद और सिंगल सुपर फास्फेट मिलाकर भरने की सलाह दी गई।
क्षेत्रीय निदेशक डॉ. धर्मवीर यादव ने कहा कि अनुसंधान केंद्र का उद्देश्य अर्ध शुष्क क्षेत्र के किसानों की समस्याओं को समझकर वैज्ञानिक समाधान उपलब्ध करवाना है ताकि किसान जलवायु के अनुसार फल और सब्जियों का उत्पादन कर बेहतर मुनाफा कमा सकें।
इस मौके पर उद्यान विकास अधिकारी डॉ. राहुल कुमार और डॉ. सांवरमल चौधरी भी मौजूद रहे।
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