महेंद्रगढ़ I ‘डिग्री फैक्ट्री’ का खेल: JBT-BEd कॉलेजों में सेटिंग-सिंडिकेट का राज, बिना क्लास बने रहे शिक्षक

रामचन्द्र सैनी
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महेंद्रगढ़ (नारनौल )

महेंद्रगढ़ में BEd-JBT कॉलेज बने डिग्री फैक्ट्री
महेंद्रगढ़ में BEd-JBT कॉलेज बने डिग्री फैक्ट्री

महेंद्रगढ़ जिले में जेबीटी और बीएड के अधिकांश कॉलेज अब शिक्षा के मंदिर नहीं, बल्कि “डिग्री की फैक्ट्रियां” बनते जा रहे हैं। यहां शिक्षा नहीं, बल्कि सेटिंग और सिंडिकेट का खेल चल रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि बिना नियमित कक्षाओं में आए ही सैकड़ों छात्र शिक्षक बनने की राह पर हैं, जिससे पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

कागजों में क्लास, जमीन पर खाली कॉलेज

सूत्रों के अनुसार, इन कॉलेजों में दाखिले का खेल पूरी तरह से संगठित तरीके से चलाया जा रहा है। करीब 70 से 80 प्रतिशत सीटों पर एडमिशन बाहरी राज्यों—राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य इलाकों के छात्रों को दिया जा रहा है। ये छात्र सालभर कॉलेज नहीं आते, लेकिन रिकॉर्ड में उनकी उपस्थिति पूरी दिखाई जाती है। नियम साफ कहते हैं कि परीक्षा में बैठने के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है, लेकिन यहां “कागजों में क्लास” लगाकर इस नियम को ठेंगा दिखाया जा रहा है। सवाल उठता है कि जब छात्र कॉलेज पहुंचे ही नहीं, तो उनकी हाजिरी कौन और कैसे भर रहा है।

एनसीटीई के नियम भी ठेंगें पर

कई कॉलेज राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के बुनियादी मानकों तक को पूरा नहीं कर रहे। जरूरी स्टाफ, इंफ्रास्ट्रक्चर और शैक्षणिक माहौल के बिना ही कॉलेज धड़ल्ले से चल रहे हैं। इसके बावजूद मान्यता बरकरार रहना अपने आप में बड़े स्तर की लापरवाही या मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

भविष्य के साथ खिलवाड़, ‘कागजी शिक्षक’ बन रहे बड़ा खतरा

इस गोरखधंधे के पीछे एक बड़ा सिंडिकेट सक्रिय बताया जा रहा है, जो छात्रों को “एडमिशन से लेकर पास कराने” तक का पूरा पैकेज देता है। मोटा कमीशन लेकर यह गिरोह छात्रों का दाखिला करवाता है और उन्हें भरोसा दिलाता है कि सालभर कॉलेज आने की जरूरत नहीं, सिर्फ एग्जाम के समय आओ और डिग्री लेकर जाओ। परीक्षा के समय इन छात्रों के लिए शहर में होटल, धर्मशालाओं और किराए के मकानों में ठहरने की व्यवस्था भी इसी नेटवर्क के जरिए करवाई जाती है। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में परीक्षा केंद्रों पर भी सांठगांठ के आरोप हैं, जहां नकल करवाने तक की सेटिंग की जाती है।

बाहरी राज्यों के छात्रों से भर रही सीटें, 75% अटेंडेंस सिर्फ रिकॉर्ड में

सबसे चिंताजनक बात यह है कि ऐसे “कागजी शिक्षक” जब स्कूलों में पहुंचेंगे, तो वे बच्चों को क्या शिक्षा देंगे? यह सीधे-सीधे आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ है इस मामले में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन पीके शर्मा ने साफ कहा है कि 75 प्रतिशत उपस्थिति और एसईटी प्रक्रिया अनिवार्य है। इसे सुनिश्चित करना कॉलेज प्राचार्य की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा है कि शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जब नियम किताबों तक सीमित हों और जमीन पर सिंडिकेट हावी हो, तो क्या महेंद्रगढ़ के ये कॉलेज “शिक्षक निर्माण केंद्र” हैं या “डिग्री बेचने वाले अड्डे”?

 

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