नूंह मेवात | 84 कोस परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालु बेहाल : बिछौर-नीमका के बीच 3 किमी तक नहीं पानी छांव की व्यवस्था, प्रशासनिक तैयारियों पर उठे सवाल
नूंह मेवात | जिले से गुजर रही ब्रज 84 कोस परिक्रमा यात्रा में हजारों श्रद्धालु आस्था के साथ शामिल हो रहे हैं, लेकिन बिछौर और नीमका गांव के बीच करीब तीन किलोमीटर लंबे मार्ग पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। भीषण गर्मी के बीच इस पूरे मार्ग पर […]

नूंह मेवात | जिले से गुजर रही ब्रज 84 कोस परिक्रमा यात्रा में हजारों श्रद्धालु आस्था के साथ शामिल हो रहे हैं, लेकिन बिछौर और नीमका गांव के बीच करीब तीन किलोमीटर लंबे मार्ग पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। भीषण गर्मी के बीच इस पूरे मार्ग पर न तो पेयजल की व्यवस्था है और न ही श्रद्धालुओं के आराम के लिए टेंट या विश्राम स्थल बनाए गए हैं।
जानकारी के अनुसार परिक्रमा शुरू होने से दो दिन पहले जिला उपायुक्त अखिल पिलानी ने स्वयं यात्रा मार्ग का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारियों को श्रद्धालुओं के लिए पानी, छांव, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए थे। इसके बावजूद बिछौर-नीमका मार्ग का यह हिस्सा अब भी व्यवस्थाओं से वंचित दिखाई दे रहा है।

84 कोस परिक्रमा मार्ग पर भीषण गर्मी के बीच बिछौर-नीमका मार्ग से गुजरते श्रद्धालु।
परिक्रमा में शामिल श्रद्धालुओं का कहना है कि मार्ग के अन्य हिस्सों में प्रशासन, समाजसेवी संस्थाओं और दानवीरों की ओर से बेहतर इंतजाम किए गए हैं, लेकिन इस तीन किलोमीटर लंबे हिस्से में पानी और छांव की कोई व्यवस्था नहीं होने से भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तेज धूप में पैदल चल रहे बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई श्रद्धालु पानी की तलाश में भटकते नजर आए, जबकि कुछ लोग सड़क किनारे बैठकर गर्मी से राहत पाने की कोशिश करते दिखाई दिए।
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन को पहले से ही परिक्रमा मार्ग की जानकारी थी और उच्च अधिकारियों द्वारा निरीक्षण भी किया जा चुका था, तो फिर इस महत्वपूर्ण हिस्से में सुविधाएं उपलब्ध क्यों नहीं कराई गईं। इसे लेकर प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
श्रद्धालुओं ने जिला प्रशासन और समाजसेवी संगठनों से मांग की है कि बिछौर-नीमका मार्ग पर जल्द से जल्द पेयजल केंद्र, अस्थायी टेंट और विश्राम स्थलों की व्यवस्था कराई जाए, ताकि आस्था की इस यात्रा में शामिल लोगों को राहत मिल सके। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या पर कितनी तेजी से कदम उठाता है।



